देश के उत्तरी एवं मध्यवर्ती भाग में तापमान बढ़ने से किसानों में चिंता
13-Feb-2025 05:44 PM
नई दिल्ली । देश के उत्तरी तथा मध्यवर्ती क्षेत्र के राज्यों में पिछले कुछ दिनों के दौरान दिन का तापमान सामान्य औसत स्तर की तुलना में 3 से 6 डिग्री सेल्सियस तक ऊंचा हो गया है जिससे गेहूं एवं जौ की उपज दर में गिरावट आने की आशंका है।
मौसम विभाग ने आगाह किया है कि सरसों एवं चना की फसल भी असामान्य गर्मी के कारण नियत समय से पहले ही पकनी शुरू हो सकती है जिससे इसकी पैदावार एवं क्वालिटी प्रभावित होने की संभावना रहेगी। रबी फसलों के लिए अभी ऊंचा तापमान लाभदायक नहीं है।
मौसम विभाग के मुताबिक उत्तरी राजस्थान, उत्तरी मध्य प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तरी छत्तीसगढ़ तथा झारखंड में दिन का तापमान सामन्य औसत से 5 डिग्री सेल्सियस या इससे ज्यादा ऊपर चल रहा है जो रबी फसलों के विकास में बाधा उत्पन्न कर सकता है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में भी गर्मी बढ़ गई है। आगे मौसम की हालत पर गहरी नजर रखने की जरूरत पड़ेगी।
इतना ही नहीं बल्कि पिछले कुछ दिनों के अंदर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पूर्वी राजस्थान, गुजरात, तथा आसपास के क्षेत्रों में रात के तापमान में भी 1 से 3 डिग्री सेल्सियस का इजाफा हो गया है जबकि मध्य प्रदेश के अधिकांश भागों, कर्नाटक तथा महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में तापमान इतना ही घट गया है।
मौसम विभाग के मुताबिक पश्चिमोत्तर एवं मध्यवर्ती राज्यों में सामान्य से ऊँचा तापमान मुख्य कृषि फसलों के साथ-साथ प्याज, लहसुन एवं टमाटर जैसी बागवानी फसलों को भी प्रभावित कर सकता है जिससे इसकी उपज दर एवं गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है।
फरवरी में सामान्य से ऊंचा तापमान रहने की संभवना मौसम विभाग पहले ही व्यक्त कर चुका था। हालांकि अभी हालत ज्यादा खराब नहीं हुई है लेकिन मौसम की स्थिति सुधरने की निश्चित गारंटी भी नहीं है। फरवरी के बाद मार्च का मौसम भी गर्म रहा और बारिश कम हुई तब फसल उत्पादन के प्रति चिंता बढ़ सकती है।
मार्च में सरसों एवं चना फसल की कटाई बड़े पैमाने पर आरंभ हो जाती है इसलिए उसेक वास्ते फरवरी में मौसम अनुकूल रहना आवश्यक है। जहां तक गेहूं एवं जौ का सवाल है तो इसकी जोरदार कटाई-अप्रैल में ही शुरू होती है।
