द्वितीय व्यापार वार्ता सफल होती तो अमरीका रेसिप्रोकल टैरिफ नहीं लगाता
03-Apr-2025 08:08 PM
नई दिल्ली। अमरीका ने कुछ अन्य देशों के साथ भारत पर भी रेसिप्रोकल टैक्स (जैसे को तैसा) लगा दिया है जिससे भारतीय निर्यातकों की कठिनाई बढ़ सकती है।
यह अलग बात है कि पाकिस्तान (29 प्रतिशत) एवं चीन (34 प्रतिशत) की तुलना में भारत पर 26 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगाया गया है।
केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सी बी आई सी) के एक भूतपूर्व चेयरमैन का कहना है कि यदि भारत और अमरीका के बीच सीमा शुल्क के मुद्दे पर कोई करार हो जाता तो अमरीका भारत पर रेसिप्रोकल टैक्स लगाने का निर्णय वापस ले सकता था।
ट्रैम्प प्रशासन को उम्मीद थी कि भारत के साथ कोई करार हो जाएगा लेकिन इसकी शर्तें कुछ ज्यादा ही कठिन थीं जिसे स्वीकार करना भारत के लिए शायद संभव नहीं हो रहा था।
अमरीका बार-बार कह रहा था कि भारत में अमरीकी उत्पादों पर 100 प्रतिसहत या इससे अधिक का आयात शुल्क लगा हुआ है जबकि इसमें आंशिक सच्चाई ही थी।
अमरीकी रेसिप्रोकल टैक्स के लागू होने से भारत को कुल झटका तो लग सकता है मगर स्वदेशी उद्योग- व्यापार एवं कृषि सेहतर के हितों की सुरक्षा भी जरुरी है।
अमरीकी शर्तों को मानने से से इन क्षेत्रों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता था इसलिए भारत सरकार ने अमरीकी कदम का इंतजार करना बेहतर समझा।
अब स्थिति स्पष्ट हो गई है और इसलिए भारत के विभिन्न क्षेत्रों पर इस टैरिफ के पड़ने वाले प्रभाव का सटीक एवं व्यावहारिक अंकलन- विश्लेषण करने की आवश्यकता है।
अमरीकी बाजारों में भारतीय उत्पादों की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सरकार को कुछ विकल्पों पर विचार करना होगा।
केन्द्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री का कहना है कि भारत और अमरीका प्रतिद्वन्द्वी नहीं हैं बल्कि पारस्परिक सहयोगी हैं
इसलिए उसी दृष्टिकोण से इस रेसिप्रोकल टैरिफ पर ध्यान दिए जाने की जरूरत हैं। वैसे भी अभी सिर्फ शुरुआत हैं जबकि भविष्य में दोनों देशों के बीच गहरी एवं विस्तृत व्यापार वार्ता हो सकती है
और इस मामले को सुलझाया जा सकता है। यदि अमरीका को टैक्स में कुछ रियायत दी गई तो वह भारतीय उत्पादों पर टैरिफ की दर में बदलाव कर सकता है या टैरिफ को समाप्त करके पुरानी स्थिति बहाल कर सकता है।
