ऊंचे दाम वाले वस्त्र उत्पादों पर जीएसटी दर बढ़ने से उद्योग एवं ग्राहक चिंतित

15-Sep-2025 05:37 PM

लुधियाना। शादी-विवाह (लग्नसरा) एवं अन्य मांगलिक उत्सवों का सीजन लगातार नजदीक आता जा रहा है। जिसमें सिले-सिलाए भारतीय परिधानों की खरीद-बिक्री काफी बढ़ने की परिपाटी रही है। मगर इस बार सरकार ने इस परम्परागत भारतीय परिधानों को महंगा कर दिया है।

दरअसल 2500 रुपए से अधिक मूल्य वाले गारमेंट्स पर जीएसटी की दर को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत नियत किया गया है जिससे इसकी कीमतों में काफी इजाफा हो जाएगा। इससे कारोबार पर कुछ असर पड़ने की आशंका है। आमतौर पर लहंगा, शेरवानी एवं साड़ियों का दाम 2500 रुपए से ऊपर ही रहता है। 

जिन उद्यमियों को सामान्य तौर पर लग्नसरा के सीजन का इंतजार रहता है और अपने कशीदाकारी वस्त्रों, हैंडलूम फैब्रिक्स तथा त्यौहारी परिधानों की अच्छी बिक्री होने की उम्मीद रहती है उन्हें इस बार ज्यादा खुशी नहीं हो रही है।

2500 रुपए का आधार काफी छोटा माना जा रहा है क्योंकि महंगाई के इस समय में परिधानों का दाम पहले ही काफी बढ़ चुका है और अब   एक खुदरा वस्त्र व्यापारी का कहना है कि सरकार का यह कदम भारतीय संस्कृति पर जुर्माना लगाने जैसा है।

पंजाब टेक्सटाइल मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष के अनुसार हाथ से होने वाली कशीदाकारी एक सजावट नहीं होती है बल्कि हजारों  कारीगरों की आजीविका का प्रमुख स्रोत भी होता है।

अब सरकार ने इसको एक विलासिता वाला उत्पाद जैसा मानकर इस पर टैक्स को बढ़ा दिया है। इससे न केवल घरेलू कारोबार पर असर पड़ेगा बल्कि निर्यात प्रदर्शन भी प्रभावित होने की आशंका है।

चीन और बांग्लादेश से शीतकालीन वस्त्र उत्पादों के आयात की वजह से भारतीय उद्योग पहले से ही कठिनाइयों का सामना कर रहा है जबकि सरकारी टैक्स नीति से उसकी समस्या और भी बढ़ने का खतरा है।