वारंगल की चपटा लालमिर्च को मिला जीआई टैग
03-Apr-2025 05:16 PM
हैदराबाद। दक्षिणी राज्य- तेलंगाना के वारंगल संभाग में उत्पादित होने वाली खास किस्म की लालमिर्च- चपटा चिली (टोमैटो चिली) को भौगोलिक संकेतक का दर्जा (जी आई टैग) प्राप्त हो गया है
जिससे उत्पादकों को निर्यात बाजार में अवसरों का लाभ उठाने तथा अतिरिक्त आमदनी का फायदा हासिल करने में सहायता मिलेगी। इस कालीमिर्च को विशिष्ट किस्म का उत्पाद माना जाता है। होने की उम्मीद है।
इस लालमिर्च का रंग चमकदार लाल होता है जबकि इसके स्वाद में नगण्य कड़वापन रहता है। अचार निर्माताओं के लिए यह लालमिर्च अत्यन्त पसंदीदा उत्पाद है।
विशेषज्ञों के अनुसार खाद्य एवं पेय पदार्थों में प्राकृतिक रूप से कलरिंग के लिए एक एजेंट (अवयव) के रूप में इसका उपयोग करना आदर्श माना जाता है।
खाद्य एवं पेय पदार्थों को रंगीन बनाने के लिए अभी सिंथेटिक डाइस (रंग-रोगन) का इस्तेमाल किया जाता है जबकि इसके स्थान पर इस लालमिर्च का उपयोग हो सकता है।
वारंगल, हन्मा कोंडा, मुलुगू तथा भूपालल्ली जैसे जिलों के कुछ गांवों में लगभग 3000 हेक्टेयर क्षेत्र में लालमिर्च की इस विशिष्ट प्रजाति की खेती होती है। इसकी तीन किस्में हैं- सिंगल पट्टी, डबल पट्टी एवं ओडालू।
इसे टोमैटो चिली के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसका आकार और रंग टमाटर जैसा होता है। पिछले करीब 80 वर्षों से इस क्षेत्र में सिंचाई सुविधा के साथ इस लालमिर्च की खेती हो रही है।
और इसका कुल उत्पादन 11 हजार टन के आसपास होता है। हाल के वर्षों में इसके क्षेत्रफल एवं उत्पादन में बढ़ोत्तरी हुई है।
भारत सरकार के जी आई रजिस्ट्री कार्यालय ने 'चपटा' लालमिर्च को भौगोलिक संकेतक का दर्जा प्रदान करने की जानकारी सम्बन्ध पक्षों को दे दी है। इससे उत्पादक काफी खुश हैं।
वारंगल चपटा लालमिर्च की फसल की कटाई-तैयारी फरवरी-मार्च के दौरान होती है क्योंकि तब तक इसके पोड्स पूरी तरह पक जाते हैं।
दो से तीन चरणों में हाथों से ही इस लालमिर्च की तुड़ाई होती है। इसके लिए श्रमिकों की भी ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती है।
