वियतनाम से काजू का निर्यात नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
20-Mar-2025 08:03 PM
हनोई। दक्षिण- पूर्व एशिया में अवस्थित देश- वियतनाम से वर्ष 2024 में प्रसंस्कृत काजू का निर्यात बढ़कर 7.30 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जिससे 4.37 अरब डॉलर की शानदार आमदनी प्राप्त हुई।
इसके साथ ही वहां से वर्ष 2023 की तुलना में 2024 के दौरान काजू की निर्यात मात्रा में 13.3 प्रतिशत और निर्यात आय में 20.2 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।
उल्लेखनीय है कि वियतनाम पिछले लगातार 18 वर्षों से दुनिया में काजू का सबसे प्रमुख निर्यातक देश बना हुआ है जबकि वर्ष 2024 में इस पोजीशन पर उसकी स्थिति और भी मजबूत हो गई। काजू कर्नेल के वैश्विक निर्यात बाजार में वियतनाम की भागीदारी बढ़कर 80 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है।
एक अग्रणी संगठन विनाकास के अनुसार उत्पादन तथा बाजार के मोर्चे पर अनेक चुनौतियां मौजूद होने के बावजूद वियतनाम से काजू के निर्यात में नियमित रूप से भारी बढ़ोत्तरी हो रही है और काजू अब सर्वाधिक विदेशी मुद्रा उपार्जित करने वाले उत्पादों में शामिल हो गया है। इसकी निर्यात आय 3 अरब डॉलर की सीमा को पहले ही पार कर चुकी है।
वर्ष 2024 के दौरान वियतनाम से सभी प्रमुख खरीदार देशों को काजू के निर्यात में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। इसके तहत 2023 के मुकाबले 2024 में अमरीका में वियतनामी काजू के निर्यात में 30.4 प्रतिशत का शानदार इजाफा हुआ जबकि एशिया तथा यूरोप के देशों में भी इसके शिपमेंट में अच्छी वृद्धि हुई।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार अमरीका में वियतनाम से वर्ष 2023 में 1,17,420 टन काजू का आयात हुआ था जो वर्ष 2024 में 31.6 प्रतिशत उछलकर 1,79,480 टन पर पहुंच गया। इस अवधि में काजू की निर्यात आय भी 68,784 करोड़ डॉलर से 14.4 प्रतिशत बढ़कर 1.07 अरब डॉलर पर पहुंच गई।
वर्ष 2024 में काजू का वैश्विक कारोबार बढ़कर 7.78 अरब डॉलर की ऊंचाई पर पहुंच गया जबकि वर्ष 2025 में यह और भी बढ़कर 8.14 अरब डॉलर पर पहुंच जाने का अनुमान है।
वर्ष 2033 तक इसके उछलकर 11.67 अरब डॉलर पर पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। स्वास्थ्यवर्धक एवं सुविधाजनक खाद्य उत्पाद (सूखा मेवा) के रूप में इसकी मांग एवं खपत लगातार बढ़ती जा रही है।
हालांकि भारत कच्चे काजू का सबसे प्रमुख उत्पादक देश है मगर प्रसंस्कृत काजू कर्नेल के निर्यात में यह वियतनाम से काफी पीछे- दूसरे नम्बर पर है।
इसका कारण यह है कि भारत में उत्पादित काजू के अधिकांश भाग की खपत घरेलू प्रभाग में ही हो जाती है जिससे निर्यात के लिए कम स्टॉक बचता है।
