19 सितम्बर से शुरू हो सकती है मानसून के वापस लौटने की प्रक्रिया
15-Sep-2026 11:02 AM
नई दिल्ली। पश्चिमोत्तर भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की तीव्रता एवं गतिशीलता (पकड़) में कमी आना शुरू हो गया है और अगले चार-पांच दिन में यह इस क्षेत्र से प्रस्थान कर सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि पश्चिमी राजस्थान से मानसून के वापस लौटने के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने लगी है और 19 सितम्बर के आसपास इसकी वापसी की प्रक्रिया आरंभ हो जाने की संभावना है। मानसून की वापसी की तिथि आमतौर पर 17 सितम्बर मानी जाती है।
लेकिन यह वापसी पूरी तरह सूखी नहीं होगी बल्कि मानसून के लौटते चरण के दौरान बारिश हो सकती है। दरअसल दक्षिण-पूर्वी राजस्थान एवं इससे सटे उत्तरी गुजरात के ऊपर एक वर्षा वाहक कम दाब का क्षेत्र बना हुआ है जो वातावरण में नमी की भरपूर मात्रा बरकरार रखने में सक्षम है। इसके फलस्वरूप उस क्षेत्र में जोरदार बारिश हो सकती है। इससे खरीफ फसलों को काफी राहत मिलेगी।
मौसम विभाग के मुताबिक पिछले दिन हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली एवं पश्चिमी मध्य प्रदेश में कहीं सामान्य तो कहीं अत्यन्त भारी बारिश हुई। मानसून की वापसी के मार्ग में ये सारे क्षेत्र भी आते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य औसत की तुलना में मानसूनी वर्षा की कमी बढ़कर 15 प्रतिशत पर पहुंच गई है। दक्षिण भारत में यह कमी ज्यादा देखी जा रही है जहां कहीं-कहीं 28 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। मानसून की विदाई के क्रम में देश के कई भागों में अच्छी वर्षा होने की उम्मीद की जा रही है।
पश्चिमी राजस्थान से निकलकर मानसून मध्यवर्ती भारत होते हुए दक्षिणी प्रायद्वीप में पहुंचेगा इसलिए रास्ते में कई जगह भारी वर्षा होने के आसार बने हुए हैं। दीर्घकालीन औसत के मुकाबले खासकर दक्षिणी प्रायद्वीप एवं पूर्वी तथा पूर्वोत्तर राज्यों में वर्षा बहुत कम हुई है।
