दक्षिण भारत के चारों उत्पादक राज्यों में धान का क्षेत्रफल घटा
15-Sep-2026 12:24 PM
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा का पर्याप्त सहारा नहीं मिलने से चालू खरीफ सीजन के दौरान सबसे प्रमुख खाद्यान्न- धान के उत्पादन क्षेत्र में भारी गिरावट आ गई। इसके तहत खासकर दक्षिण भारत में रकबा काफी घट गया। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं झारखंड में भी धान का क्षेत्रफल गत वर्ष से पीछे रह गया। धान की खेती की प्रक्रिया लगभग समाप्त हो चुकी है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि मौजूदा खरीफ सीजन में 11 सितम्बर 2026 तक धान का कुल उत्पादन क्षेत्र 426.81 लाख हेक्टेयर पर पहुंच सका जो पिछले साल की समान अवधि के रकबा 443.78 लाख हेक्टेयर से करीब 4 प्रतिशत या 16.97 लाख हेक्टेयर कम मगर सामान्य (पंचवर्षीय) औसत क्षेत्रफल 405.36 लाख हेक्टेयर से काफी अधिक है। पिछले साल धान का उत्पादन क्षेत्र तेजी से बढ़कर सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया था।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष के मुकाबले वर्तमान खरीफ सीजन के दौरान धान के उत्पादन क्षेत्र में कर्नाटक में 4.54 लाख हेक्टेयर, तेलंगाना में 4.46 लाख हेक्टेयर, आंध्र प्रदेश में 1.90 लाख हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश में 1.84 लाख हेक्टेयर, मध्य प्रदेश में 1.75 लाख हेक्टेयर, तमिलनाडु में 1.40 लाख हेक्टेयर, महाराष्ट्र में 1.15 लाख हेक्टेयर तथा झारखंड में 97 हजार हेक्टेयर की गिरावट आ गई।
कुछ राज्यों में धान का रकबा बढ़ा भी है जबकि अन्य प्रांतों में उत्पादन क्षेत्र में सीमित कमी-वृद्धि हुई है। धान संभवतः ऐसा अकेला कृषि उत्पाद है जिसकी खेती देश के सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों में होती है। अगले महीने (अक्टूबर) से इसकी नई फसल की कटाई-तैयारी आरंभ हो जाएगी।
क्षेत्रफल में गिरावट आने तथा मानसून की वर्षा कम होने से इस बार धान का उत्पादन घटने की संभावना है जिसे देखते हुए सरकार ने केन्द्रीय पूल के लिए इसकी खरीद के लक्ष्य में थोड़ी कटौती कर दी है।
