2023-24 के मार्केटिंग सीजन में 120 लाख टन सोयाबीन की क्रशिंग
21-Oct-2024 07:05 PM
इंदौर । सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2023-24 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में 120.50 लाख टन सोयाबीन की आपूर्ति हुई जिसमें से 120 लाख टन की क्रशिंग- प्रोसेसिंग हो गई।
इसके अलावा 4.50 लाख टन सोयाबीन का सीधा घरेलू उपयोग तथा 12 हजार टन का निर्यात हुआ पिछले साल (2022-23 में) 116 लाख टन सोयाबीन की आवक तथा 115 लाख टन की क्रशिंग हुई थी जबकि 4 लाख टन की प्रत्यक्ष घरेलू उपयोग एवं 22 हजार टन का निर्यात किया गया था।
सोपा की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक 2022-23 की तुलना में 2023-24 के मार्केटिंग सीजन के दौरान सोयाबीन का पिछला बकाया स्टॉक 25.15 लाख टन से गिरकर 24.07 लाख टन, उत्पादन 124.11 लाख टन से घटकर 118.74 लाख टन तथा आयात 7.03 लाख टन से फिसलकर 6.25 लाख टन रह गया।
इस कुल स्टॉक में से 13 लाख टन का स्टॉक अगली बिजाई के लिए आरक्षित रखा गया और इसके बाद विपणन के लिए कुल उपलब्धता 2022-23 सीजन के 143.29 लाख टन से घटकर 136.06 लाख टन रह गई।
पूरी खपत मात्रा के बाद 30 सितम्बर 2024 को किसानों, मिलर्स एवं व्यापारियों के पास 11.44 लाख टन सोयाबीन का अधिशेष स्टॉक बच गया जो 30 सितम्बर 2023 को उपलब्ध स्टॉक 24.07 लाख टन के आधे से भी कम है। समझा जाता है कि उत्पादन में कमी आने तथा क्रशिंग में बढ़ोत्तरी होने के कारण सोयाबीन के स्टॉक में भारी गिरावट आई।
सोपा के मुताबिक जहां तक सोयामील का सवाल है तो इसका पिछला बकाया स्टॉक 2.47 लाख टन से घटकर 1.17 लाख टन रह गया लेकिन सोयाबीन की अधिक क्रशिंग होने के कारण इसका उत्पादन 91.79 लाख टन से बढ़कर 94.69 लाख टन पर पहुंच गया।
इसी तरह समुद्री तथा स्थलीय मार्ग से सोयाबीन डीओसी का निर्यात भी 18.36 लाख टन से उछलकर 21.28 लाख टन पर पहुंचा। विदेशों से सोयामील का आयात 27 हजार टन से फिसलकर 25 हजार टन तथा फीड निर्माण में उपयोग 67 लाख टन से गिरकर 66 लाख टन पर अटक गया।
खाद्य उद्देश्य में सोयामील की खपत 8 लाख टन के गत वर्ष के स्तर पर ही बरकरार रही। 1 अक्टूबर 2024 को 83 हजार टन सोयामील का अधिशेष स्टॉक बचा हुआ था जो गत वर्ष के बकाया स्टॉक 1.17 लाख टन से कम रहा।
1 अक्टूबर 2024 से सोयाबीन की नई फसल के लिए मार्केटिंग सीजन औपचारिक तौर पर आरंभ हो गया और अब मंडियों में इसकी भारी आपूर्ति होने लगी है।
