आपूर्ति की अधिकता से सोयाबीन की कीमतों पर दबाव- चीन से मिल सकता है समर्थन

19-Jan-2026 04:45 PM

शिकागो। आगामी सप्ताहों के दौरान अमरीकी सोयाबीन के निर्यात तथा मूल्य में सुधार आने के आसार हैं लेकिन कीमतों में तेजी सीमित ही रहेगी क्योंकि दक्षिण अमरीका महाद्वीप और खासकर ब्राजील में रिकॉर्ड उत्पादन होने की संभावना से वैश्विक बाजार में इस महत्वपूर्ण तिलहन का विशाल स्टॉक उपलब्ध रहेगा।

आपूर्ति की अधिकता से सोयाबीन के दाम पर लम्बे समय से दबाव देखा जा रहा है लेकिन अवकाश का सीजन आरंभ होने से पूर्व यानी दिसम्बर 2025 के अंतिम सप्ताह तथा वर्ष 2026 के प्रथम सप्ताह के दौरान इसमें कुछ तेजी आई थी। 

अमरीका में इस बार सोयाबीन का शानदार उत्पादन हुआ है जबकि कनाडा में गेहूं एवं कैनोला की पैदावार में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है।

उधर अर्जेन्टीना में गेहूं तथा ब्राजील में सोयाबीन का उत्पादन तेजी से बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान है। ऑस्ट्रेलिया में भी गेहूं का पर्याप्त उत्पादन होने की सूचना है। 

ब्राजील तथा अर्जेन्टीना में सोयाबीन एवं मक्का की फसल का निर्बाध गति से विकास हो रहा है और मौसम भी काफी हद तक अनुकूल बना हुआ है ब्राजील में सोयाबीन की नई फसल की कटाई-तैयारी आरंभ हो चुकी है और आगे इसकी रफ्तार बढ़ जाएगी। चीन के आयातक सोयाबीन की खरीद के लिए वहां पहले से ही सक्रिय हैं।

उधर अमरीका को भरोसा है कि चीन के खरीदार शीघ्र ही उसके सोयाबीन का भी भारी मात्रा में आयात शुरू कर सकते हैं। समझा जाता है कि सितम्बर-अक्टूबर 2025 के दौरान चीन के आयातकों द्वारा करीब 70 लाख टन अमरीकी सोयाबीन की खरीद की गई मगर इसका शिपमेंट नवम्बर-दिसम्बर तक नहीं हो सका। 

चीन की निष्क्रियता से अमरीकी सोयाबीन का निर्यात प्रभावित हो रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन के दौरान अभी तक चीन को अमरीका से केवल 7.95 लाख टन सोयाबीन का वास्तविक निर्यात शिपमेंट हुआ जो गत वर्ष की समान अवधि के निर्यात 160.60 लाख टन की तुलना में नगण्य माना जा रहा है।

इसके फलस्वरूप अमरीका से समीक्षाधीन अवधि में सोयाबीन का कुल निर्यात 283.1 लाख टन से लुढ़ककर 152.30 लाख टन पर अटक गया।

हालांकि वर्ष 2025 के दौरान चीन में सोयाबीन का आयात तेजी से बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया लेकिन इसमें ब्राजील से होने वाले विशाल आयात का सर्वाधिक योगदान रहा। अमरीका की उम्मीद अब भी चीन पर टिकी हुई है।