आवक में देरी एवं आयात की सुस्त गति से तुवर के भाव में सुधार

24-Jan-2026 01:02 PM

कलबुर्गी। विदेशों से आयात की रफ्तार कुछ धीमी रहने, घरेलू फसल की आवक में देरी होने तथा रुपए के कमजोर पड़ने से तुवर के दाम में थोड़ी तेजी आई है। रुपए के अवमूल्यन से तुवर का आयात महंगा बैठ रहा है।

महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं तेलंगाना जैसे शीर्ष उत्पादक राज्यों की प्रमुख मंडियों में पिछले दिन नई तुवर के दाम में 125 से 250 रुपए प्रति क्विंटल तथा पुरानी तुवर के भाव में 100-200 रुपए प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई। आयातित तुवर का मूल्य भी 50-100 रुपए सुधर गया। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अखिल भारतीय स्तर पर तुवर का औसत थोक मंडी भाव 31 दिसम्बर 2025 को 7003 रुपए प्रति क्विंटल दर्ज किया गया था जो 21 जनवरी 2026 को बढ़कर 7283 रुपए प्रति क्विंटल  पर पहुंच गया

लेकिन फिर भी 8000 रुपए प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे रहा। प्रमुख उत्पादक राज्यों में तुवर की सरकारी खरीद या तो शुरू हो गई है या शीर्घ ही आरंभ होने वाली है। इससे कीमतों पर कुछ असर पड़ सकता है।

शीघ्र व्यापारिक संस्था- इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के अनुसार जनवरी-नवम्बर 2025 के दौरान देश में कुल 10,54,969 टन तुवर का आयात हुआ

जो वर्ष 2024 के इन्हीं महीनों के आयात 11,43,143 टन से करीब 8 प्रतिशत कम रहा। इस बार अफ्रीकी देशों में तुवर का उत्पादन उम्मीद से कम हुआ और म्यांमार में भी उत्पादन घटने की संभावना है। 

व्यापार विश्लेषकों के अनुसार घरेलू मंडियों में तुवर की आवक उम्मीद से कम हो रही है जिससे संकेत मिलता है कि उत्पादक इसका स्टॉक रोकने का प्रस्ताव कर रहे हैं। ठंड का मौसम होने से भी मंडियों में माल कम आ रहा है।

व्यापारिक पाइप लाइन काफी हद तक खाली है। नई फसल के आने की उम्मीद से व्यापारियों एवं मिलर्स ने अपना स्टॉक खाली कर दिया था अफ्रीकी देशों का अधिकांश माल पहले ही भारत आ चुका है

और अब फरवरी-मार्च से म्यांमार से नई तुवर का आयात जोर पकड़ने की संभावना है। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने तुवर का घरेलू उत्पादन 2024-25 सीजन के 36.24 लाख टन से घटकर 2025-26 में 35.97 लाख टन रह जाने का अनुमान लगाया है।