आयात की जटिलता एवं त्यौहारी मांग से तुवर में मजबूती के आसार
04-Aug-2026 07:34 PM
मुम्बई। खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख दलहन फसल-अरहर (तुवर) के बिजाई क्षेत्र में 9 प्रतिशत की भारी गिरावट आ चुकी है और इसका रकबा गत वर्ष के 38.44 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 34.91 लाख हेक्टेयर रह गया है। कुछ राज्यों में मौसम एवं मानसून की स्थिति भी फसल के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं है इसलिए इसका अगला उत्पादन घटने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
म्यांमार से भारत में तुवर का आयात घट रहा है। अफ्रीकी देशों में तुवर के नए माल की आवक जल्दी ही जोर पकड़ने की संभावना है। वहां उत्पादन कुछ कम हो सकता है। भारत में मोजाम्बिक, मलावी, तंजानिया एवं सूडान सहित कुछ अन्य अफ्रीकी देशों से तुवर का आयात होता है।
घरेलू प्रभाग में यद्यपि सरकार के पास अब भी तुवर का अच्छा खासा स्टॉक बताया जा रहा है जिसे जरूरत पड़ने पर मार्केट में उतारा जा सकता है। लेकिन किसानों, व्यापारियों / स्टॉकिस्टों एवं दाल मिलर्स / प्रोसेसर्स के पास तुवर का सीमित स्टॉक बचा हुआ है। अगला उत्पादन कमजोर होने तथा भाव बढ़ने की संभावना से उत्पादक तुवर के स्टॉक को अपने पास रोकने अतः थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बाजार में उतारने का प्रयास कर सकते हैं। अब त्यौहारी सीजन की मांग भी निकलने की उम्मीद है।
तुवर का भाव आगामी समय में कुछ हद तक मजबूत रहने के आसार हैं लेकिन इसमें जबरदस्त तेजी आने में अभी संदेह है। बेशक नई फसल आने में अभी बहुत देर है और घरेलू मांग भी मजबूत रह सकती है लेकिन सरकार के पास मौजूद स्टॉक तथा अफ्रीका से होने वाला आयात इसकी कीमतों में जोरदार तेजी पर कुछ हद तक अंकुश लगा सकता है। महाराष्ट्र के कुछ भागों में वर्षा का अभाव होने से किसानों को तुवर की दोबारा बिजाई करने के लिए विवश होना पड़ सकता है।
