अगले साल कृषि उत्पादों का वैश्विक बाजार भाव मजबूत रहने के आसार
17-Dec-2025 01:03 PM
मुम्बई। वर्ष 2025 की तुलना में 2026 के दौरान कृषि जिंसों का वैश्विक बाजार भाव कुछ ऊंचा एवं तेज रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। एक अग्रणी एग्री मार्केट रिसर्च एजेंसी के अनुसार वार्षिक औसत आधार पर अनाजी फसलों एवं तिलहनों का दाम बढ़ने की उम्मीद है लेकिन तेजी का दायरा सीमित रह सकता है।
2025-26 सीजन के दौरान उत्पादन की स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद है जिससे वर्ष 2026 के लगभग सम्पूर्ण अवधि में आपूर्ति एवं उपलब्धता सुगम बनी रह सकती है।
दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया की सरकारी एजेंसी- अबारेस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रिकॉर्ड वैश्विक उत्पादन को देखते हुए अगले साल कृषि उत्पादों के वैश्विक बाजार मूल्य में थोड़ी नरमी आ सकती है।
लेकिन अनाजों एवं तिलहनों की आयात मांग में अच्छी बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है जिससे कुल मिलाकर कारोबार का अच्छा विस्तार हो सकता है। वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता तथा भू-राजनैतिक तनाव के बावजूद अनाज एवं तिलहन की मांग स्थिर रह सकती है।
एक अमरीकी विश्लेषक के अनुसार वर्ष 2026 में कृषि उत्पादों के वैश्विक बाजार की स्थिति का अनुमान लगाने में सावधानी एवं सर्तकता दिखाने की जरूरत है और सहजता से आशावादी दृष्टिकोण बनाना मुश्किल है। वर्ष 2020 के दशक के शुरूआती कुछ साल तक कृषि उत्पाद बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया
लेकिन अब कई जिंसों की कीमतों में स्थिरता का माहौल बनने लगा है। जब भारत ने चावल के निर्यात को नियंत्रित करने का प्रयास किया था तब इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न के वैश्विक बाजार मूल्य में जोरदार तेजी आ गई थी। लेकिन अब भाव सामान्य स्तर पर आ गया है।
समीक्षकों के मुताबिक इस वर्ष गेहूं, दलहनों, तिलहनों एवं मोटे अनाजों (खासकर मक्का) के वैश्विक उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी होने के संकेत मिले हैं जबकि इसका पिछला बकाया स्टॉक भी ऊंचा है।
इसके साथ-साथ सामुद्रिक परिवहन खर्च में स्थिरता बनी हुई है इसलिए आयातक देशों में शिपमेंट बढ़ाने की जोरदार प्रयास किया जा सकता है और इसके फलस्वरूप समय-समय पर कृषि उत्पादों के दाम में थोड़ी-बहुत तेजी आ सकती है।
गेहूं और मक्का का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने से इसकी कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। सोयाबीन की भी बेहतर आपूर्ति हो रही है और चीनी का भाव घटकर निचले स्तर पर आ गया है।
