अल नीनो का संभावित खतरा
17-Jan-2026 01:22 PM
फिलहाल ला नीना मौसम चक्र के सक्रिय रहने के बावजूद देश के अधिकांश भागों में शीतकालीन वर्षा का भारी अभाव देखा जा रहा है और किसानों को कृत्रिम साधनों- (नहरों एवं ट्यूब वेल) की सहायता से रबी फसलों की सिंचाई के लिए विवश होना पड़ रहा है। इससे लागत खर्च में स्वाभाविक रूप से बढ़ोत्तरी हो रही है।
अब एक मौसम पूर्वानुमान केन्द्र ने जुलाई 2026 में अल नीनो मौसम चक्र के आने और सक्रिय होने की संभावना व्यक्त की है जिसे खतरे की घंटी माना जा रहा है। दरअसल जुलाई भारत में सर्वाधिक वर्षा वाला महीना होता है और उस समय खरीफ फसलों की खेती बड़े जोर शोर से होती है।
इसके बाद अगस्त में भी लगभग यही पोजीशन रहती है। अल नीनो मौसम चक्र के दौरान भारत में अक्सर बारिश कम होने की परिपाटी रही है।
यदि जुलाई-अगस्त के दो महीनों में वर्षा का अभाव रहा और सूखे की स्थिति बनी तो न केवल खरीफ फसलों की बिजाई प्रभावित हो सकती है बल्कि बांधों-जलाशयों में पानी का पर्याप्त भंडार भी नहीं होगा। इससे अनेक तरह की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
जुलाई-अगस्त में तापमान ऊंचा रहता है और भयंकर गर्मी पड़ती है। इससे खेतों की मिटटी सूख जाती है और उसमें दरारें पड़ जाती हैं जिससे खरीफ फसलों की बिजाई में बाधा पड़ती है।
भारत पहले से ही जलवायु परिवर्तन एवं ग्लोबल वार्मिंग का दंश झेल रहा है और ऐसी हालत में अगर अल नीनो मौसम चक्र के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून का समीकरण बिगड़ता है तो कृषि क्षेत्र और ग्रामीण अर्थ व्यवस्था पर इसका गहरा नकारात्मक असर पड़ सकता है।
लेकिन एक राहत की बात यह है कि मौसम पूर्वानुमान केन्द्र ने कहा है कि भारत में सूखे वाला मौसम आरंभ होने से पूर्व सामान्य औसत से अधिक बारिश हो सकती है।
अल नीनो के आने का समय भी जुलाई के अंत तक आंका गया है और संभवतः इसे पूरी तरह सक्रिय होने में माह-डेढ़ माह का समय लग सकता है।
यदि ऐसा हुआ तो दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान देश में बारिश ज्यादा प्रभावित नहीं होगी। सितम्बर में यदि वर्षा कुछ कम होगी तब भी खरीफ फसलों पर गंभीर असर नहीं पड़ेगा।
अपेक क्लाइमेट सेंटर का पूर्वानुमान कितना सच साबित होता है, यह तो आने वाला समय बताएगा। लेकिन इतना अवश्य है कि अल नीनो मौसम चक्र भारत के लिए लाभप्रद नहीं माना जाता है।
