अल नीनो से मानसून की वर्षा पर असर पड़ने की आशंका

19-Jan-2026 09:06 PM

तिरुअनन्तपुरम। अपेक क्लाइमेट सेंटर की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सूखा पड़ने वाला अल नीनो मौसम चक्र इस वर्ष जुलाई तक आ सकता है जिससे भारत में दक्षिण-;पश्चिम मानसून की बारिश पर असर पड़ सकता है।

उल्लेखनीय है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून जून से सितम्बर के चार महीनों तक सक्रिय रहता है   और इस अवधि में जुलाई-अगस्त के दौरान देश में सर्वाधिक वर्षा होती है। जून-सितम्बर के दौरान ही खरीफ फसलों धान, अरहर (तुवर), उड़द, मूंग, ज्वार, बाजरा, मक्का, रागी, सोयाबीन, मूंगफली एवं कपास आदि की खेती होती है। 

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो मौसम चक्र की अवधि के दौरान भारत की तरफ नमी युक्त हवा का प्रवाह बाधित हो जाता है।

यदि अल नीनो की ज्यादा सक्रियता रही तो मानसून सीजन के दौरान देश में बारिश हो सकती है जिससे खरीफ फसलों की बिजाई एवं प्रगति में बाधा पड़ने की आशंका रहेगी।

अल नीनो की वजह से अक्सर एशियाई देशों और खासकर भारत में वर्षा कम होने तथा सूखा पड़ने की संभावना रहती है। 

विगत वर्षों के दौरान अल नीनो वाले साल में दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत में या तो देर से आया या फिर काफी कमजोर साबित हुआ। इससे देश के कई भागों में सूखे का संकट बढ़ गया और खरीफ फसलों को काफी नुकसान पहुंचा।

लेकिन क्लाइमेट सेंटर का कहना है की अल नीनो मौसम चक्र के आने से पूर्व भारत में पर्याप्त वर्षा हो सकती है। इससे खरीफ फसलों की अगैती बिजाई शुरू करने में सहायता मिलेगी। 

वर्ष 2023 में अल नीनो मौसम चक्र जून में ही आ गया था और कमोबेश अगले 11 महीनों तक बरकरार रहा था। इससे भारत में मानसून काफी हद तक प्रभावित हुआ।

वर्ष 2024 का समय सबसे ज्यादा गर्म आंका गया और उस समय खाद्यान्न- खासकर धान तथा दलहन की फसल को क्षति हुई थी।

तदनुरूप देश में खाद्य महंगाई काफी बढ़ गई वर्ष 2025 भी वैश्विक स्तर पर सबसे गर्म आंका गया और वर्ष 2026 के दौरान संसार के अंकित भागों में तापमान सामान्य स्तर से ऊंचा रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।