अमरीका की नजर अब भारतीय दलहन बाजार पर केन्द्रित

20-Jan-2026 11:47 AM

नई दिल्ली। द्विपक्षीय व्यापार समझौता के लिए बातचीत के क्रम में सोयाबीन तथा मक्का के मोर्चे पर भारत की तरफ से कोई रियायत नहीं मिलने के बाद अमरीका का ध्यान अब भारतीय दलहन बाजार पर केन्द्रित हो गया है।

हालांकि भारत स्वयं दुनिया में दाल दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक देश है लेकिन घरेलू मांग एवं खपत उत्पादन से ज्यादा होने के कारण वहां दलहनों के भारी आयात की आवश्यकता बनी रहती है। 

अमरीका में मटर एवं मसूर सहित कुछ अन्य दलहनों तथा बीन्स का अभी सीमित उत्पादन होता है लेकिन उसे लगता है कि अगर भारत में निर्यात तेजी से बढ़ाने का अवसर मिला तो कनाडा, ऑस्ट्रेलिया एवं म्यांमार की भांति उसके किसानों को भी दलहनों के उत्पादन में गुणात्मक बढ़ोत्तरी करने का मजबूत आधार प्राप्त हो सकता है। 

भारत और अमरीका के बीच व्यापार वार्ता लगातार जोर पकड़ती जा रही है। वर्तमान चरण की बातचीत में भारत में दलहन फसलों पर ऊंचे सीमा शुल्क के मुद्दे पर विशेष चर्चा हो रही है।

यद्यपि भारत में तुवर एवं उड़द का आयात फिलहाल सीमा शुल्क से पूरी तरह मुक्त है और देसी चना तथा मसूर पर भी केवल  10-10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा हुआ है जबकि पीली मटर पर 1 नवम्बर 2025 से 30 प्रतिशत का शुल्क लगाया गया है लेकिन अमरीका को यह शुल्क भी काफी ऊंचा प्रतीत होता है। 

अमरीका के नीति निर्माता अपने राष्ट्रपति पर इस बात के लिए दबाव डाल रहे हैं कि वे प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता के एक भाग के तौर पर भारत को मसूर, चना (काबुली सहित) तथा अन्य दलहनों पर आयात शुल्क घटाने के लिए  विवश करें।

यद्यपि अमरीका की दलील है कि ऊंचे आयात शुल्क के कारण भारतीय दलहन बाजार में उसके उत्पादकों की भागीदारी पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है जबकि भारत इस आयात शुल्क को घरेलू किसानों के हितों की रक्षा एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने का एक सशक्त माध्यम मान रहा है। अब दलहनों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।