अमरीका के साथ लगातार वार्ता में जीएम सोयामील को शामिल नहीं करने का आग्रह

24-Oct-2025 01:14 PM

इंदौर। स्वदेशी तेल-तिलहन उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के एक महत्वपूर्ण संगठन- सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) ने केन्द्रीय वाणिज्य सचिव को भेजे एक पत्र में आंकड़ों एवं परिस्तिथियों का हवाला देते हुए अमरीका के साथ होने वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौता (बीटीए) के तहत वहां से जीएम सोया मील के आयात की अनुमति नहीं देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। 

सोपा के अनुसार 2025-26 के सीजन में 3.66 लाख टन के बकाया स्टॉक, 105.36 लाख टन के संभावित उत्पादन तथा 6 लाख टन के अनुमानित आयात के साथ सोयाबीन की कुल उपलब्धता 115.02 लाख टन पर पहुंचने के आसार हैं।

इसमें से 12 लाख टन का स्टॉक अगली बिजाई के लिए सुरक्षित रखा जाएगा। 50 लाख टन का प्रत्यक्ष उपयोग होगा और 95 लाख टन की क्रशिंग- प्रोसेसिंग होगी। इस तरह कुल 112 लाख टन का उपयोग होगा और सीजन के अंत में 3.02 लाख टन का स्टॉक बच जाएगा। 

जहां तक सोयामील का सवाल है तो इसका बकाया स्टॉक 1.08 लाख टन था जबकि सीजन के दौरान 77.90 लाख टन का उत्पादन होने की संभावना है। इससे इसकी कुल उपलब्धता 78.98 लाख टन पर पहुंचेगी।

इसमें से 8 लाख टन सोयामील का निर्यात, 8 लाख टन का घरेलू खाद्य उपयोग तथा 62 लाख टन का घरेलू फीड इस्तेमाल होने की संभावना है। इसके फलस्वरूप सीजन के अंत में 98 हजार टन का अधिशेष स्टॉक बच सकता है।

सोपा द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि घरेलू मांग एवं आपूर्ति के बीच संतुलन की स्थिति रहेगी और इसलिए विदेशों से सोयामील के आयात की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

यदि अमरीका से जीएम सोयामील आयात की अनुमति दी गई तो समग्र रूप से भारतीय कृषि क्षेत्र और खासकर सोयाबीन उत्पादकों के लिए यह विनाशकारी साबित हो सकता है।

देश के सोयाबीन उत्पादक पहले से ही काफी निराश और हताश है क्योंकि इस महत्वपूर्ण तिलहन का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे चल रहा है।

सस्ते जीएम सोयामील का आयात शुरू होने पर इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ेगी जिससे किसानों के साथ-साथ उद्योग को भी भारी नुकसान होगा और आत्मनिर्भरता का लक्ष्य काफी पीछे छूट जाएगा।