अमरीका को तिल निर्यात के लिए गुणवत्ता प्रमाण पत्र लेना आवश्यक

11-Nov-2024 07:09 PM

नई दिल्ली । केन्द्र सरकार ने अमरीका को तिल बीज का निर्यात करने से पूर्व भारतीय निर्यातकों के लिए प्राधिकृत एजेंसियों / संस्थाओं से गुणवत्ता प्रमाण पत्र (क्वालिटी सर्टिफिकेट) हासिल करना अनिवार्य बना दिया है ताकि अमरीकी अधिकारियों द्वारा किसी भारतीय खेप (कार्गो) को रोके जाने से बचाया जा सके। सरकार का यह निर्णय 16 नवम्बर 2024 से प्रभावी माना जाएगा।

उल्लेखनीय है कि भारत संसार में तिल के सबसे प्रमुख उत्पादक देशों में शामिल है और यहां सभी किस्मों एवं श्रेणियों (रंगों) के तिल का उत्पादन होता है जिसमें सफेद, काला, पीला एवं भूरा-काला तिल भी सम्मिलित है।

जानकार सूत्रों के अनुसार स्वदेशी उद्योग-व्यापार क्षेत्र से यह शिकायत मिली थी कि भारत से निर्यात होने वाले तिल की कुछ खेपों को अमरीकी अधिकारियों द्वारा कुछ गंतव्य बंदरगाहों पर यह कहते हुए रोक दिया गया कि उसमें कीटनाशी अवशेष का अंश मान्य या स्वीकृत सीमा से ज्यादा है।

अभी तक गुणवत्ता प्रमाण पत्र लेना स्वैच्छिक था लेकिन शिकायतों के बाद सरकार ने इसे अनिवार्य बना दिया है। यह गुणवत्ता प्रमाण पत्र 'इंडियन ऑयल सीड्स एंड प्रोड्यूस एक्सपोर्ट प्रोमोशन कौंसिल' द्वारा जारी किया जाएगा। 

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार भारत से अमरीका को लगभग 30 हजार टन तिल का वार्षिक निर्यात किया जाता है। गुणवत्ता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए जिस एजेंसी को प्राधिकृत किया गया है वह केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अधीनस्थ है।

यह एजेंसी पहले से ही यूरोपीय संघ को तिल के होने वाले निर्यात के लिए क्वालिटी सर्टिफिकेट जारी कर रही है। यूरोपीय संघ गुणवत्ता के प्रति अत्यन्त सतर्क रहता है। 

भारत यूरोपीय संघ को तिल का निर्यात करने वाले अग्रणी देशों में शामिल है। वहां तकरीबन 70 हजार टन तिल का वार्षिक आयात होता है जिसमें अकेले भारतीय उत्पाद का योगदान 50 प्रतिशत के आसपास रहता है।

वैसे भी भारत संसार में तिल के सबसे बड़े निर्यातक देशों में से एक है जो वैश्विक मांग के एक चौथाई भाग को अकेले पूरा करता है। भारत से अमरीका और यूरोपीय संघ के अलावा चीन, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, ताईवान, मलेशिया, रूस एवं ईरान को भी भारी मात्रा में तिल का निर्यात किया जाता है।