अमरीका से डीडीजीएस का आयात मक्का एवं सोयाबीन की कीमतों को कर सकता है प्रभावित

11-Feb-2026 03:26 PM

मुम्बई। भारत ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के अंतर्गत अमरीका से डीडीजीएस के आयात की स्वीकृति प्रदान कर दी है। यदि इसका भारी मात्रा में सस्ता आयात शुरू हुआ तो घरेलू प्रभाग में मक्का, सोयाबीन, सोया डीओसी एवं सरसों खल (रेपसीड मील) आदि की कीमतों पर इसका गहरा प्रतिकूल असर पड़ सकता है। 

उल्लेखनीय है कि जब एथनॉल निर्माण के लिए मक्का अथवा चावल की प्रोसेसिंग होती है तब एक उप उत्पाद के तौर पर डिस्टीलर्स ड्राईड ग्रेन्स विद सोल्यूबल्स (डीडीजीएस) प्राप्त होता है।

इसे सोयामील का निकटवर्ती विकल्प माना जाता है जिसका उपयोग पॉल्ट्री फीड के रूप में बड़े-पैमाने पर किया जाता है। पशु आहार / पॉल्ट्री फीड के लिए आयात होने वाले डीडीजीएस पर भारत में 15 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगा हुआ है जिसे अब कम या खत्म किया जा सकता है। 

एक अग्रणी उद्योग संस्था- कम्पाउण्ड लिव स्टॉक फीड मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन के अनुसार डीडीजीएस के आयात से मक्का पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और सोयामील का बाजार भी आंशिक रूप से ही प्रभावित होगा क्योंकि फीड निर्माण में सोयामील को 100 प्रतिशत विस्थापित करना संभव नहीं हो पाएगा। कुछ मामलों में सोयामील का पोषक गुण सर्वोत्तम माना जाता है इसलिए वहां इसका इस्तेमाल बंद नहीं हो सकता है। 

लेकिन एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि भारतीय बाजार में मक्का से निर्मित डीडीजीएस की आपूर्ति पहले से ही अत्यधिक हो रही है और अब चावल से निर्मित डीडीजीएस भी भारी मात्रा में आने लगा है। घरेलू बाजार में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति अत्यन्त सुगम बनी हुई है इसलिए विदेशों से इसके आयात की कोई खास जरूरत नहीं है।

इसका आयात 1-2 लाख टन से ज्यादा नहीं होना चाहिए और आयातित माल का दाम भी स्वदेशी उत्पाद के समकक्ष रहना चाहिए। आईग्रेन इंडिया के डायरेक्टर राहुल चौहान का कहना है कि अगर इससे ज्यादा आयात हुआ तो मक्का, सोयाबीन तथा सरसों की कीमतों पर असर पड़ सकता है। पिछले कुछ दिनों के अंदर इसमें नरमी आ चुकी है।