अमरीका द्वारा यूरोपीय देशों पर टैरिफ की धमकी से भारत को सतर्क रहने की जरूरत

19-Jan-2026 08:57 PM

नई दिल्ली। यूरोपीय देश डेनमार्क के अधीनस्थ क्षेत्र- ग्रीनलैंड को हथियाने की जिद पर अड़े अमरीका के राष्ट्रपति ने धमकी दी है कि इस पर कोई करार (डील) नहीं हुआ तो यूरोप के आठ देशों पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा और जून 2026 से इसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत नियत किया जाएगा।

अमरीकी राष्ट्रपति की यह धमकी भारत के लिए सतर्क रहने की चेतावनी मानी जा सकती है क्योंकि अमरीकी प्रसाशन अपने हितों को साधने के वास्ते कभी भी और कोई भी कदम उठा सकता है।

अमरीका के वादों-इरादों पर आंख मूंदकर भरोसा करना भारत के लिए घातक साबित हो सकता है इसलिए इसे अपनी व्यापारिक रणनीति बनाते समय सावधान रहना होगा। 

भारत और अमरीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार संधि के लिए बातचीत के क्रम में भारत को यह ध्यान रखना होगा कि उसकी व्यापारिक रणनीति की स्वायत्ता पर कोई संकट उत्पन्न न हो।

अमरीका की नीति अस्थिर हो गई है और उसमें बार-बार बदलाव हो रहे हैं। हाल के घटनाक्रमों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि अमरीका अपने स्वार्थ के लिए किसी भी समझौते को तोड़ सकता है और किसी भी देश पर अनावश्यक दबाव बढ़ा सकता है। 

अमरीका ने यूरोप के जिन आठ देशों पर 10 प्रतिशत का टैरिफ बनाने की चेतावनी दी है उसमें डेनमार्क, नार्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन (इंग्लैंड), नीदरलैंड  (हॉलैंड और फिनलैंड) शामिल है।

इन सभी देशों ने ग्रीन लैंड के मुद्दे पर डेनमार्क का साथ देने और अमरीका का विरोध करने का निश्चय किया है। आमतौर पर इन सभी यूरोपीय देशों को अमरीका का सहयोगी माना जाता है लेकिन जब अमरीका उसके खिलाफ कदम उठा सकता है तो इससे भारतीय रणनीतिकारों को भी सबक सिखने की आवश्यकता है।

नया टैरिफ 1 फरवरी 2026 से प्रभावी होने की संभावना है। यदि इससे बात नहीं बनी तो 1 जून 2026 से इसे 25 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है। यह टैरिफ यूरोपीय देशों पर गहरा आघात कर सकता है।