बाघा-अटारी सीमा बंद होने से कश्मीर के अखरोट उद्योग को राहत

29-May-2025 03:51 PM

श्रीनगर । पाकिस्तान के साथ भारत का व्यापार पूरी तरह बंद होने से जम्मू कश्मीर के अखरोट उत्पादकों और व्यापारियों को काफी राहत मिल रही है।

ज्ञात हो कि 2 मई को भारत सरकार ने पाकिस्तान से सभी तरह के आयात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की घोषणा करते हुए बाघा-अटारी व्यापार मार्ग को बंद कर दिया था।

इससे सूखे मेवे का कारोबार प्रभावित होने लगा। अफगानिस्तान से पाकिस्तान के रास्ते भारत में अखरोट का आना बंद हो गया। सीमा पार व्यापार तो सरकारी निर्णय से आहत हो रहा है लेकिन कश्मीर घाटी के अखरोट उत्पादकों को इससे राहत मिल रही है।

कश्मीरी   अखरोट की घरेलू मांग एवं कीमत में अचानक अच्छी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है। उत्पादकों एवं व्यापारियों को अच्छा दाम मिलने लगा है। 

कश्मीर वॉलनट ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि पहले भारतीय बाजार में अफगानी अखरोट का भारी प्रवाह रहता था और सस्ता होने के कारण स्थानीय उत्पादकों को अपने माल का दाम नीचे रखने के लिए विवश होना पड़ता था।

लेकिन अब अफगानिस्तान से आयात ठप्प पड़ गया है  इसलिए घरेलू बाजार में कश्मीरी अखरोट की मांग जोर पकड़ने लगी है। इसके फलस्वरूप पिछले 20-25 दिनों के अंदर कश्मीरी अखरोट के दाम में 15-20 प्रतिशत का इजाफा हो गया है।

पिछले अनेक वर्षों से एसोसिएशन अखरोट के आयात को नियंत्रित करने की मांग सरकार से करता रहा है लेकिन इस पर कभी निर्णय नहीं लिए गया। 

वर्ष 2023 में भारत अफगानी अखरोट का सबसे प्रमुख आयातक देश बन गया। उस समय वहां से भारत में करीब 95.90 लाख डॉलर मूल्य के 19,00,960 किलो अखरोट मंगाया गया था।

कश्मीर घाटी में अखरोट का अच्छा उत्पादन होता है लेकिन विदेशों से सस्ते माल का विशाल आयात होने से उत्पादकों को आकर्षक मूल्य प्राप्त करने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ता है। भारत में अमरीका (कैनिफोर्निया), चीन, अफगानिस्तान एवं चिली जैसे देशों से अखरोट मंगाया जाता है।

अखरोट का बागानी क्षेत्र 2017-18 में 47 हजार हेक्टेयर था जो 2021-22 तक आते-आते घटकर 46,200 हेक्टेयर रह गया। कश्मीर से अखरोट का निर्यात भी घटता जा रहा है। देश में 90 प्रतिशत अखरोट का उत्पादन जम्मू-कश्मीर में होता है और इसकी खेती इसी तरह आर्गेनिक पद्धति से की जाती है।