भारत चावल का सबसे प्रमुख उत्पादक देश बनने की राह पर अग्रसर

29-May-2025 07:16 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान से पता चलता है कि भारत में 2024-25 सीजन के दौरान खाद्यान्न का सकल उत्पादन बढ़कर 3532 लाख टन पर पहुंच गया जो 2023-24 सीजन के उत्पादन से करीब 6 प्रतिशत ज्यादा है।

पिछले साल की तुलना में इस बार चावल, गेहूं, दलहन तथा तिलहन के उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई है। चावल का उत्पादन 8 प्रतिशत उछलकर 1490.70 लाख टन तथा गेहूं का उत्पादन 3.7 प्रतिशत बढ़कर 1175 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान है।            

यदि उम्मीद के अनुरूप भारत में 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन के दौरान 1491 लाख टन चावल का उत्पादन होता है तो वह चीन को पीछे छोड़कर दुनिया में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का सबसे बड़ा उत्पादक देश बन जाएगा।

चीन अब तक संसार में चावल और गेहूं का सबसे प्रमुख उत्पादक देश बना हुआ था जबकि भारत दूसरे नम्बर पर चल रहा था। उल्लेखनीय है कि अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) ने 2024-25 सीजन के दौरान चीन में कुल 1452.80 लाख टन चावल का उत्पादन का अनुमान लगाया है जबकि भारतीय कृषि मंत्रालय का घरेलू उत्पादन अनुमान उससे करीब 38 लाख टन ज्यादा है।

ध्यान देने की बात है कि भारत वर्ष 2012 से ही दुनिया में चावल का सबसे प्रमुख निर्यातक देश बना हुआ है जबकि चीन को अक्सर विदेशों से इसका भारी आयात करना पड़ता है।

भारत में उत्पादन तेजी से बढ़ने के कारण चावल के निर्यात योग्य स्टॉक में भी इजाफा होगा और वैश्विक चावल निर्यात बाजार में इसकी भागीदारी बढ़ जाएगी। 

वर्ष 2024 में दक्षिण-पश्चिम मानसून की हालत अच्छी रही और देश में सामान्य औसत के मुकाबले 108 प्रतिशत वर्षा हुई जिससे धान की फसल को काफी फायदा हुआ। इसके क्षेत्रफल में भी वृद्धि हुई।

इसके फलस्वरूप उत्पादन काफी बढ़ गया। कृषि मंत्रालय के अनुसार मौसम तथा वर्षा की अनुकूल स्थिति के कारण धान की औसत उपज दर भी कुछ बढ़ गई।

चालू वर्ष के दौरान भी मानसून सीजन में 106 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान लगाया गया है जिससे एक बार फिर धान-चावल का घरेलू उत्पादन 2025-26 के सीजन में बेहतर हो सकता है।