भारत की एथनॉल नीति गन्ना के बजाए अनाज पर केन्द्रित
05-Nov-2025 04:23 PM
नई दिल्ली। पिछले तीन-चार साल से एथनॉल के निर्माण में अनाज और खासकर मक्का एवं चावल के उपयोग में भारी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है जिससे गन्ना से एथनॉल के उत्पादन पर निर्भरता में कमी आ गई है।
अब हालत यह हो गई है कि तेल विपणन कंपनियों को आपूर्ति के लिए गन्ना के बजाये अनाज से निर्मित एथनॉल का बहुत ज्यादा कोटा आवंटित किया जा रहा है और गन्ना से निर्मित एथनॉल के बिक्री मूल्य में भी अपेक्षित बढ़ोत्तरी नहीं की जा रही है। इससे चीनी उद्योग काफी निराश और हताश है।
2025-26 के एथनॉल आपूर्ति सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के लिए तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) द्वारा अभी तक 10.51 लाख लीटर एथनॉल की आपूर्ति का आर्डर जारी किया गया है जिसमें से केवल 28 प्रतिशत का कोटा गन्ना आधारित उद्योग को आवंटित हुआ है जबकि शेष 72 प्रतिशत एथनॉल की आपूर्ति का आर्डर अनाज आधारित डिस्टीलरीज को दिया गया है।
गन्ना आधारित उद्योग द्वारा गन्ना जूस, शुगर, सीरप, बी-हैवी शीरा, तथा सी-हैवी शीरा से एथनॉल बनाया जाता है जबकि अनाज आधारित डिस्टीलरीज मुख्यत: मक्का एवं चावल से एथनॉल का उत्पादन करती है। डिस्टीलरीज को भारतीय खाद्य निगम द्वारा रियायती मूल्य पर चावल का भारी स्टॉक उपलब्ध करवाया जाता है।
पहले ऐसा नहीं था। 2019-20 के मार्केटिंग सीजन में ओएमसी द्वारा चीनी क्षेत्र से 1.57 अरब लीटर एथनॉल की खरीद की गई थी जो उसकी कुल एथनॉल खरीद का 91 प्रतिशत रहा था।
2022-23 के सीजन तक चीनी क्षेत्र की भागीदारी 70 प्रतिशत के आसपास रही थी लेकिन 2023-24 के सीजन से इसमें भारी गिरावट आने लगी। 2023-24 के सीजन में पहले चीनी का उत्पादन 12 प्रतिशत तक घटने का अनुमान लगाया गया था जिसे देखते हुए सरकार ने एथनॉल निर्माण में गन्ना के उपयोग पर मात्रात्मक प्रतिबंध लगा दिया था
क्योंकि उस समय देश में लोकसभा के लिए आम चुनाव होने वाला था और सरकार चीनी के दाम को नियंत्रण में रखना चाहती थी। इसके साथ ही एथनॉल निर्माण में मक्का के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाने लगा जिसका भाव नरम चल रहा था। यह परिपाटी अब भी बरकरार है जिससे चीनी उद्योग की चिंता एवं परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
