भारत में तुवर का उत्पादन घटने और आयात स्थिर रहने का अनुमान
17-Dec-2025 06:08 PM
नई दिल्ली। हालांकि पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष अरहर (तुवर) के बिजाई क्षेत्र में थोड़ी बढ़ोत्तरी हुई लेकिन विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं से फसल को हुए भारी नुकसान के कारण इसके उत्पादन में काफी गिरावट आने की आशंका है।
उद्योग-व्यापार क्षेत्र के अनुसार 2024-25 के सीजन में करीब 35 लाख टन तुवर का उत्पादन हुआ था जो 2025-26 के सीजन में 5 लाख टन घटकर 30 लाख टन के आसपास सिमट सकता है। महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं गुजरात जैसे शीर्ष उत्पादक प्रांतों में तुवर की फसल को ज्यादा नुकसान होने की सूचना मिल रही है।
2025-26 के सीजन में 8.71 लाख टन के पिछले बकाया स्टॉक, 30 लाख टन के संकलित उत्पादन तथा 12 लाख टन के अनुमानित आयात के साथ देश में तुवर की सकल उपलब्धता 50.71 लाख टन पर पहुंच सकती है।
इसमें से 46 लाख टन का घरेलू उपयोग तथा 20 हजार टन का निर्यात होने का अनुमान है जिससे मार्केटिंग सीजन के अंत में बकाया स्टॉक घटकर 4.51 लाख टन पर अटक सकता है।
इसके मुकाबले 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में 6.91 लाख टन के पिछले बकाया स्टॉक, 35 लाख टन के उत्पादन तथा 12 लाख टन के आयात के साथ तुवर की कुल उपलब्धता 53.91 लाख टन पर पहुंची थी
जिसमें से 45 लाख टन का घरेलू उपयोग तथा 20 हजार टन का निर्यात हुआ और सीजन के अंत में 8.71 लाख टन का स्टॉक बच गया।
यद्यपि केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने प्रथम अग्रिम अनुमान में 2025-26 सीजन के दौरान 36 लाख टन तुवर के उत्पादन की संभावना व्यक्त की है लेकिन उद्योग-व्यापार क्षेत्र को यह आंकड़ा वास्तविकता से काफी ऊंचा प्रतीत होता है।
तुवर उत्पादन के लिए आगे तीन और अनुमान जारी होने वाले हैं इसलिए सरकारी आंकड़े में बदलाव हो सकता है।
तुवर खरीफ सीजन की सबसे प्रमुख दलहन फसल है। इसका उत्पादन घरेलू मांग एवं जरूरत से काफी कम होने के कारण विदेशों से विशाल मात्रा में इसके आयात की आवश्यकता पड़ती है।
भारत में तुवर का आयात मुख्यतः म्यांमार तथा कुछ अफ्रीकी देशों से किया जाता है जिसमें तंजानिया, मोजाम्बिक, मलावी, सूडान एवं केन्या आदि शामिल है।
