भारत से चावल का निर्यात बढ़कर 215 लाख टन पर पहुंचने का उस्डा का अनुमान
12-Nov-2024 06:04 PM
नई दिल्ली । शानदार घरेलू उत्पादन एवं नियंत्रणों- प्रतिबंधों की समाप्ति के कारण इस वर्ष भारत से चावल के निर्यात में अच्छी बढ़ोत्तरी होने की प्रबल संभावना है। वैश्विक निर्यात बाजार में भारतीय चावल प्रतिस्पर्धी मूल्य स्तर पर उपलब्ध है और इसलिए प्रमुख आयातक देशों में इसकी मांग मजबूत बनी हुई है। चावल का निर्यात शिपमेंट जोर पकड़ने लगा है।
अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) ने नवम्बर की अपनी मासिक रिपोर्ट में भारत से 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में चावल का कुल निर्यात बढ़कर 215 लाख टन पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया है जो 2023-24 सीजन के शिपमेंट 144.30 लाख टन से 70.70 लाख टन ज्यादा है।
उस्डा की रिपोर्ट के अनुसार भारत में चावल का पिछला बकाया स्टॉक गत वर्ष के 350 लाख टन से 70 लाख टन बढ़कर इस बार 420 लाख टन पर पहुंचने की संभावना है जबकि चावल का कुल उत्पादन भी 1378.30 लाख टन से 71.70 लाख टन उछलकर 1450 लाख टन पर पहुंचने के आसार हैं।
भारत में विदेशों से चावल का आयात नहीं होता है क्योंकि यह स्वयं ही दुनिया में इसका सबसे बड़ा निर्यातक देश है। उस्डा की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में चावल की घरेलू खपत 2023-24 सीजन के 1164 लाख टन से 46 लाख टन बढ़कर 2024-25 के सीजन में 1210 लाख टन पर पहुंचने की संभावना है जबकि देश से इसका निर्यात 144.30 लाख टन से 70.70 लाख टन बढ़कर 215 लाख टन पर पहुंच सकता है।
मांग और खपत (निर्यात सहित) को पूरा करने के बाद 2024-25 सीजन के अंत में भारत में चावल का बकाया अधिशेष स्टॉक बढ़कर 445 लाख टन पर पहुंचने का अनुमान है जो 2023-24 सीजन की समाप्ति पर उपलब्ध स्टॉक 420 लाख टन से 25 लाख टन ज्यादा है। भारत से बासमती और गैर बासमती-दोनों श्रेणियों के चावल का निर्यात होता है।
