बजट-प्रावधानों से दाल-दलहन क्षेत्र खुश नहीं
04-Feb-2026 04:55 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय वित्त मंत्री द्वारा संसद में पेश लिए गए आम बजट के प्रावधानों से स्वदेशी दाल-दलहन उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र खुश नहीं है। वस्तुतः कृषि क्षेत्र द्वारा भी बजट पर निराशा व्यक्त की गई है।
इस बजट में न तो दलहनों की खरीद के लिए और न ही बीज अनुसंधान एवं विकास के लिए राशि का आवंटन बढ़ाने का कोई जिक्र किया गया है। अब कृषि मंत्रालय के लिए जो बजट नियत हुआ है उसमें से ही इन दो पदों के लिए राशि नियत की जाएगी।
एक अग्रणी व्यापारिक संस्था- इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन / आईपीजीए के सचिव का कहना है कि इस बजट से सभी हैरान हैं। दलहन क्षेत्र के बारे में इस बजट में कोई चर्चा तक नहीं हुई।
केवल कृषि क्षेत्र के लिए बजट की राशि कुछ बढ़ाई गई है। इस बजट में खाद्य सब्सिडी का अनुमान बढ़ाकर 2.28 ट्रिलियन रुपए नियत किया गया है जो पिछले बजट में 2.03 ट्रिलियन रुपए निर्धारित हुआ था
लेकिन इस राशि के अधिकांश भाग का उपयोग चावल (धान) एवं गेहूं की खरीद पर किया जाएगा। इससे दलहनों एवं तिलहनों की खरीद के लिए कम राशि उपलब्ध रहेगी।
भारत में उपयोग के मुकाबले उत्पादन कम होने से दलहनों के विशाल आयात की आवश्यकता पड़ती है जिस पर भारी-भरकम बहुमूल्य विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। दलहनों का घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता को कम या खत्म किया जा सकता है।
एक अग्रणी विश्लेषक एवं आई ग्रेन इंडिया के प्रेसीडेंट- राहुल चौहान का कहना है कि सरकार को पता है कि चावल, गेहूं एवं मक्का जैसे अनाजों का भाव एमएसपी से नीचे है इसलिए उसकी खरीद बढ़ानी पड़ेगी।
इसके फलस्वरूप उसके लिए ज्यादा राशि का आवंटन हुआ है। उसके मुकाबले दलहन-तिलहन की खरीद के लिए आवंटित राशि को नगण्य माना जा सकता है।
दलहनों के उन्नत बीज का विकास होना जरुरी है ताकि इसकी उपज दर एवं पैदावार बढ़ाने में सहायता मिल सके। इस पर सरकार को दिन देना चाहिए था।
