बारिश है वरदान
24-Jan-2026 11:40 AM
लम्बी प्रतीक्षा के बाद अंततः पश्चिमोत्तर भारत में शीतकालीन का आगमन हो गया जो किसी वरदान से कम नहीं है। एक तो इससे रबी फसलों को नया जीवनदान मिल गया और दूसरे, किसानों को सिंचाई के खर्च से भी छुटकारा मिल गया। इस वर्षा की सख्त जरूरत महसूस की जा रही थी।
ध्यान देने वाली बात कि 22-23 जनवरी को पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली एवं चंडीगढ़ में झमाझम बारिश हुई जिससे किसानों को रबी फसलों के बेहतर उत्पादन की उम्मीद बढ़ गई।
यह इलाका देश में गेहूं, जौ और सरसों का सबसे बड़ा उत्पादन क्षेत्र माना जाता है जबकि वहां चना का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर होता है। उत्तर प्रदेश में मटर एवं मसूर की अच्छी खेती होती है। यह राज्य मटर के उत्पादन में पहले तथा मसूर के उत्पादन में दूसरे नम्बर पर रहता है।
वहां गेहूं का उत्पादन भी सबसे ज्यादा होता है जबकि राजस्थान सरसों तथा जौ का सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त है जहां चना और गेहूं का भी भरपूर उत्पादन होता है। जहां तक पंजाब का सवाल है तो वह केन्द्रीय पूल में गेहूं का सर्वाधिक योगदान देने वाला राज्य है।
हरियाणा में भी गेहूं की भारी सरकारी खेती होती है। हरियाणा में सरसों का भी काफी उत्पादन होता है। इस वर्षा से उपरोक्त सभी राज्यों में विभिन्न रबी फसलों को भारी राहत मिलेगी।
मौसम ठंडा है और तापमान नीचे चल रहा है। इससे खेतों की मिटटी में नमी का अंश लम्बे समय तक बरकरार रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने 24 जनवरी को भी उत्तर प्रदेश सहित अन्य निकटवर्ती प्रांतों में बारिश होने की संभावना व्यक्त की है।
रबी फसलों की बिजाई समाप्त हो चुकी है और इसकी निर्बाध प्रगति तथा शानदार पैदावार के लिए मौसम का अनुकूल रहना आवश्यक है। अभी तक मौसम की हालत में कोई बिगाड़ नहीं आया है।
कहीं-कहीं घना कोहरा एवं धुंध का प्रकोप देखा गया मगर इसकी अवधि छोटी रही। अब बारिश का सहारा मिलने से फसलों का विकास बेहतर ढंग से संभव हो सकेगा। राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं, मक्का, चना, मसूर तथा सरसों के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है और इसके शानदार उत्पादन की उम्मीद बढ़ गई है।
