बारिश की कमी से खरीफ फसलों के रकबे में जोरदार गिरावट

03-Jul-2026 06:04 PM

नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा का अभाव होने के कारण इस बार 25 जून तक खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र घटकर 182.72 लाख हेक्टेयर पर अटक गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 236.46 लाख हेक्टेयर से करीब 23 प्रतिशत या 53.74 लाख हेक्टेयर कम है। गत वर्ष की तुलना में इस बार लगभग सभी प्रमुख खरीफ फसलों के रकबे में गिरावट देखी जा रही है। इसमें धान, कपास, दलहन, तिलहन एवं मोटे अनाज संवर्ग की फसलें शामिल हैं। 

जून में मानसून का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और दीर्घकालीन औसत के मुकाबले केवल 58 प्रतिशत बारिश हो सकी। वर्षा का वितरण भी असमान रहा। कई क्षेत्रों में यह पहुंच ही नहीं सका। मानसून पर अल नीनो मौसम चक्र का स्पष्ट प्रभाव देखा गया और आगे भी यह असर बरकरार रह सकता है। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार खरीफ सीजन के सबसे प्रमुख खाद्यान्न धान का उत्पादन क्षेत्र पिछले साल की तुलना में   8.65 लाख हेक्टेयर घटकर इस बार 25.75 लाख हेक्टेयर रह गया। इसी तरह दलहनों का बिजाई क्षेत्र 21.46 लाख हेक्टेयर से गिरकर 14.92 लाख हेक्टेयर तथा तिलहनों का क्षेत्रफल 36.41 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 16.99 लाख हेक्टेयर पर आ गया। तिलहन फसलों के रकबे में 19.42 लाख हेक्टेयर की जोरदार गिरावट दर्ज की गई। बिजाई क्षेत्र में गिरावट के मामले में कपास भी पीछे नहीं रही। 

देश का 55-60 प्रतिशत क्षेत्र पूरी तरह वर्षा पर आश्रित है और इसलिए मानसून की बारिश में भारी गिरावट आने पर खरीफ फसलों के लिए जोखिम बढ़ना स्वाभाविक ही है। यद्यपि जुलाई के आरंभ से मानसून की गति में सुधार देखा जा रहा है लेकिन यह कब तक बरकरार रहता है- इस पर ध्यान रखना आवश्यक है। देश का बहुत बड़ा भाग जून के अंत तक सूखे की चपेट में था।