बारिश और ठंडे मौसम से गेहूं की फसल को फायदा

28-Jan-2026 08:46 PM

नई दिल्ली। पश्चिमोत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के कारण हो रही वर्षा गेहूं की फसल के लिए लाभदायक मानी जा रही है। मौसम भी ठंडा है और तापमान नीचे होने से खेतों की मिटटी में नमी लम्बे समय तक बरकरार रह सकती है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान जैसे प्रांतों के कई इलाकों में इतनी अच्छी बारिश हुई है कि वहां मध्य फरवरी तक गेहूं की फसल की अतिरिक्त सिंचाई करने की जरूरत नहीं पड़ेगी बशर्तें तापमान में एकाएक जोरदार इजाफा न हो जाए। 

रबी सीजन के सबसे प्रमुख खाद्यान्न- गेहूं का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 328.04 लाख हेक्टेयर के रिकॉर्ड स्तर से भी 6.13 लाख हेक्टेयर उछलकर इस बार 334.17 लाख हेक्टेयर के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है जो पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 312.35 लाख हेक्टेयर से करीब 22 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।

इसके तहत खासकर मध्य प्रदेश में गेहूं का रकबा 8 लाख हेक्टेयर एवं राजस्थान में 4 लाख हेक्टेयर बढ़ा है। हरियाणा एवं गुजरात में भी बिजाई बढ़ी है।

दूसरी ओर उत्तर प्रदेश, पंजाब तथा बिहार में गेहूं की बिजाई इस बार गत वर्ष से कुछ पीछे रह गई। देश में लगभग 95 प्रतिशत गेहूं का उत्पादन इन्हीं राज्यों में होता है और वहां गेहूं की फसल बानस्पतिक अवस्था में पहुंच गई है।

अगले महीने से उसमें फूल और दाना लगने की प्रक्रिया आरंभ हो जाएगी इसलिए फरवरी-मार्च में मौसम का अनुकूल रहना आवश्यक है। सरकार ने गेहूं के उत्पादन का लक्ष्य इस बार 1190 लाख टन नियत किया है और उसे यह लक्ष्य हासिल हो जाने का पूरा भरोसा भी है।