बासमती चावल का उत्पादन घटने एवं भाव मजबूत रहने की संभावना
18-Sep-2026 01:32 PM
नई दिल्ली। बासमती धान के क्षेत्रफल में करीब 4 प्रतिशत की गिरावट आने से बासमती चावल का उत्पादन घटने की संभावना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं हरियाणा में इस धान के रकबे में अपेक्षाकृत ज्यादा गिरावट आई है। इससे बासमती धान का बाजार (मंडी) भाव मजबूत रह सकता है।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार भारतीय बासमती चावल निर्यातक 2026-27 के मार्केटिंग सीजन में विदेशी खरीदारों से ऊंची कीमत की मांग कर सकते हैं। अमरीका-ईरान के बीच जारी तनाव के कारण पश्चिम एशिया, मध्य पूर्व एवं खाड़ी क्षेत्र के देशों में भारतीय बासमती चावल की मांग बेहतर रहने की उम्मीद है क्योंकि ये देश अपनी आंतरिक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारी मात्रा में चावल मंगाकर उसका बड़ा स्टॉक बनाने का प्रयास कर सकते हैं। भारत से करीब 70 प्रतिशत बासमती चावल का निर्यात इन्हीं देशों में होता है। 2025-26 के सीजन में इसका उत्पादन बढ़कर 100 लाख टन के करीब पहुंच गया था।
व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक वर्ष 2025 में बासमती धान का सकल उत्पादन क्षेत्र 24.90 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा था जबकि वर्ष 2026 में इसमें करीब एक लाख हेक्टेयर की कमी आ गई। पंजाब में इसका रकबा गत वर्ष के लगभग बराबर रहा। वहां उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। गत वर्ष भारी वर्षा एवं भयंकर बाढ़ के कारण फसल क्षतिग्रस्त हो गई थी। वर्ष 2024 में बासमती धान का कुल घरेलू उत्पादन क्षेत्र 27.50 लाख हेक्टेयर के आसपास पहुंच गया था जिसके मुकाबले इस बार क्षेत्रफल काफी घट गया है।
बासमती धान का उत्पादन पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली तथा जम्मू कश्मीर (दो जिलों) में होता है।
