बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर 75 प्रतिशत से नीचे आया
16-Jan-2026 04:55 PM
नई दिल्ली। बारिश की कमी एवं नियमित निकासी के कारण बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक लगातार घटता जा रहा है।
केन्द्रीय जल आयोग की रिपोर्ट से पता चलता है कि देश के 166 प्रमुख बांधों-जलाशयों में पानी का स्टॉक गिरकर उसकी कुल भंडारण क्षमता के 75 प्रतिशत से भी नीचे आ गया है जबकि अक्टूबर में यह 90 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ था। देश के चार संभागों में जल स्तर 80 प्रतिशत से नीचे है। आगे इसमें और कमी आ सकती है।
आयोग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार इन 166 प्रमुख जलाशयों में फिलहाल 134.915 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी का स्टॉक बचा हुआ है जो उसकी कुल भंडारण क्षमता 183.565 बीसीएम का 73.50 प्रतिशत है। वैसे पानी का यह स्टॉक गत वर्ष की समान अवधि की तुलना में 7 प्रतिशत बिंदु तथा 10 वर्षीय औसत के मुकाबले 24 प्रतिशत बिंदु ज्यादा है।
इधर मौसम विभाग के आंकड़ों से ज्ञात होता है कि देश के जिन 724 जिलों से मौसम सम्बन्धी आंकड़े जुटाए जाते हैं उसमें से 89 प्रतिशत जिलों में चालू वर्ष के दौरान अभी तक बारिश नहीं या नगण्य हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर इस अवधि में केवल 1.8 मि०मी० वर्षा दर्ज की गई जो सामान्य औसत 6.7 मि०मी० से 73 प्रतिशत कम रही।
हालांकि देश के पश्चिमी संभाग में जल स्तर अपेक्षाकृत ऊंचा है लेकिन अन्य क्षेत्रों में यह नीचे आ गया है। बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर उसकी कुल भंडारण क्षमता के सापेक्ष पश्चिमी क्षेत्र में 84 प्रतिशत तथा उत्तरी एवं दक्षिणी क्षेत्र में 70 प्रतिशत से नीचे रहा। पश्चिमी संभाग में कुल 53 प्रमुख जलाशय है।
इसमें से गोवा के एक मात्र जलाशय में 89 प्रतिशत क्षमता के समतुल्य पानी का स्टॉक मौजूद है जबकि महाराष्ट्र के बांधों में 85 प्रतिशत तथा गुजरात के जलाशयों में 82 प्रतिशत पानी का भंडार उपलब्ध है।
लेकिन उत्तरी क्षेत्र के 11 प्रमुख बांधों में कुल 13.298 बीसीएम पानी का स्टॉक बचा हुआ है जबकि उसकी कुल भंडारण क्षमता 19.836 बीसीएम की है।
हिमाचल प्रदेश में जल स्तर घटकर 60 प्रतिशत से भी कुछ नीचे आ गया है जबकि पंजाब में यह 64 प्रतिशत और राजस्थान में 84 प्रतिशत पर मौजूद है।
फिलहाल रबी फसलों की सिंचाई के लिए तो पानी का गंभीर संकट उत्पन्न नहीं हुआ है लेकिन यदि वर्षा का अभाव बना रहा तो आगे समस्या बढ़ सकती है।
