चालू वर्ष के दौरान मसूर एवं मटर का घट सकता है उत्पादन
23-Jan-2026 02:58 PM
यंगून। भारत सबकॉन्टिनेंटल एग्री फाउंडेशन (बीएसएफ) आयोजित साऊथ एशिया एग्री फोरम (एम ए एसएफ) 2026 में सैमलिस्ट (विशेषज्ञ समूह) का कहना था कि भारत में मटर एवं मसूर के आयात की निति में फ़िलहाल बदलाव नहीं है हालांकि चीन अब कनाडा से मटर के आयात पर लागू 100 प्रतिशत के भारी-भरकम सीमा शुल्क के वापस लेने पर सहमत हो गया है जिससे उसके बाजार का द्वार कमाई मटर के लिए दोबारा खुल सकता है। लेकिन बाजार पर इसका ज्यादा प्रभाव पड़ना मुश्किल लगता है चीन बाजार खुलने से कनाडा में मटर का भाव कुछ सुधर सकता है और भारतीय बाजार में भी थोड़ी तेजी मजबूती का माहौल बन सकता है लेकिन वैश्विक बाजार के साथ-साथ स्वयं कनाडा में मटर की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति अत्यंत सुगम बनी हुई है और इसका दाम घटकर पिछले अनेक वर्षो के निचले स्तर पर आ गया है जिससे इसकी खेती में कनाडाई किसानो की दिलचस्पी घट सकती है।
कनाडा के कृषि मंत्रालय ने भी वर्ष 2026 के दौरान मटर का घरेलू बिजाई क्षेत्र 15.5 प्रतिशत घटकर 12 लाख हेक्टेयर पर अटके का अनुमान लगाया है। जिससे इसके उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है। इसी तरह मसूर के क्षेत्रफल में 9.7 प्रतिशत की कमी आने की संभावना व्यक्त की गई है भारत में भी उत्पादन काम हो सकता है।
जहां तक मसूर का सवाल है तो कनाडा में इसका विशाल स्टॉक मौजूद है जबकि उसके अनुरूप घरेलू एवं निर्यात मांग मजबूत नहीं है वहां उत्पादक का फ़िलहाल लाल मसूर का स्टॉक रोकने तथा हरी मसूर की बिक्री बढ़ाने पर ध्यान दे रहे है क्योंकि इसकी मांग एवं अपेक्षाकृत बेहतर है। भारत में मसूर पर 10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा हुआ है और घरेलू प्रभाग में आपूर्ति एवं उपलब्धता की सामान्य स्थिति तथा कीमतों में काफी हद तक स्थिरता रहने रहने के कारण इसकी आयात नीति में परिवर्तन होने की संभावना फ़िलहाल बहुत कम है।
कनाडा में हरी मसूर का निर्यात ऑफर मूल्य 1400 डॉलर प्रति टन के शीर्ष स्तर से घटकर अब 700 डॉलर प्रति टन पर आ गया है इसका आयात बांग्लादेश में 4.50 लाख टन तथा तुर्की में 2.50 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है मसूर के बल्क निर्यात एवं कंटेनर शिपमेंट के लिए कीमतों में 30-45 डॉलर प्रति टन का अंतर् देखा जा जा रहा है इसलिए आयातक मुख्यतः बल्क आयात को ही प्राथमिकता दे रहे है।
