चना की बिजाई में किसानों का उत्साह एवं आकर्षण बरकरार

05-Nov-2025 06:05 PM

नई दिल्ली। रबी सीजन के सबसे प्रमुख दलहन- चना की बिजाई में भारतीय किसानों का उत्साह एवं आकर्षण बरकरार है क्योंकि एक तो सरकार ने इसके न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में अच्छी बढ़ोत्तरी कर दी है

और दूसरे, प्रमुख उत्पादक प्रांतों में मौसम की हालत भी अनुकूल बनी हुई है। चना पर 10 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा हुआ है जबकि हाल ही में पीली मटर के आयात पर 30 प्रतिशत का सीमा शुल्क लगाया गया है।

इससे चना बाजार को कुछ मजबूती मिलने की उम्मीद है। वैसे भी पिछले साल के मुकाबले चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत में ऑस्ट्रेलिया से देसी चना का आयात काफी घट गया है और आगे भी इसमें ज्यादा बढ़ोत्तरी होने की संभावना नहीं है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार चालू रबी सीजन में 31 अक्टूबर 2025 तक चना का घरेलू उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 14.92 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल की इसी अवधि के बिजाई क्षेत्र 12.15 लाख हेक्टेयर से 2.77 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।

इस बार चना का सामान्य औसत क्षेत्रफल 101 लाख हेक्टेयर आंका गया है और उम्मीद की जा रही है कि अंतिम वास्तविक रकबा इससे ऊपर निकल जाएगा। किसानों के समक्ष खाद-बीज का कोई संकट नहीं है। 

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक एवं गुजरात जैसे शीर्ष उत्पादक प्रांतों में चना की बेहतर बिजाई के लिए तमाम अनुकूल परिस्थितियां मौजूद है।

कुछ क्षेत्रों में इसका दाम घटकर न्यूतनम समर्थन मूल्य के आसपास आ गया था लेकिन इससे बिजाई की सक्रियता पर ज्यादा असर पड़ने की आशंका नहीं है।

एमएसपी में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई है और आवश्यकता पड़ने पर सरकारी एजेंसियां केन्द्रीय बफर स्टॉक के लिए इसकी अच्छी खरीद कर सकती है। 

ऑस्ट्रेलिया में चना की नई फसल की जोरदार कटाई-तैयारी जारी है और मंडियों में लगातार इसकी भारी आवक हो रही है। लेकिन दक्षिण एशिया में इसकी मांग कमजोर है। पिछले वर्ष भारत की विशाल खरीद के कारण कीमतों में उछाल आया था लेकिन इस बार बाजार नरम पड़ गया है।

इधर घरेलू प्रभाग में चना की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति काफी हद तक सुगम बनी हुई है। केन्द्र सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए 118 लाख टन चना के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है।