चीनी के निर्यात की गति जल्दी ही जोर पकड़ने की उम्मीद
18-Dec-2025 05:06 PM
मुम्बई। केन्द्र सरकार ने 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के लिए उद्योग को 15 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति प्रदान की है। इसके अनुबंध एवं शिपमेंट की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है और आगामी महीनों में इसकी रफ्तार तेज होने की उम्मीद है।
एक अग्रणी उद्योग विश्लेषक के अनुसार यद्यपि फिलहाल चीनी की अधिकांश निर्यात मात्रा अनुबंध के चरण में ही है और इसके शिपमेंट की गति धीमी है लेकिन जनवरी 2026 से शिपमेंट की रफ्तार बढ़ सकती है क्योंकि मिलर्स द्वारा अब तक किए गए सौदों के सापेक्ष चीनी की डिलीवरी अच्छी तरह से आरंभ कर दी जाएगी। समझा जाता है कि केन्द्र सरकार मार्च 2026 में चीनी के निर्यात कोटे के उपयोग की समीक्षा कर सकती है।
विश्लेषक के अनुसार चीनी निर्यात के अधिकांश सौदे पिछले 10-15 दिनों में हुए है इसलिए इसके शिपमेंट में समय लग सकता है।
इस बार चीनी मिलों द्वारा अपने नियत निर्यात कोटे के अधिकांश भाग का इस्तेमाल किए जाने की उम्मीद है और यदि इसमें कमी आती है तो वह 1-2 लाख टन से ज्यादा नहीं होगी।
दूसरे शब्दों में कहा जाए तो 2025-26 सीजन के दौरान देश से 13-14 लाख टन चीनी का निर्यात हो सकता है। इससे पूर्व सरकार ने 2024-25 के मार्केटिंग सीजन में 10 लाख टन चीनी के निर्यात की स्वीकृति प्रदान की थी जिसमें से करीब 8 लाख टन का शिपमेंट हो सका था।
चालू मार्केटिंग सीजन के दौरान चीनी के सकल उत्पादन में 16 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान लगाया जा रहा है। एथनॉल निर्माण में कम इस्तेमाल होने की संभावना से खाद्य उद्देश्य के लिए चीनी की उपलब्धता बढ़ जाएगी।
हालांकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चीनी का भाव नीचे चल रहा है लेकिन फिर भी भारत से इसके निर्यात का प्रदर्शन बेहतर रहने की उम्मीद है क्योंकि इसके एक्स फैक्ट्री मूल्य में नरमी आ गई है। वैश्विक बाजार में अभी ब्राजील तथा थाईलैंड की चीनी का दब-दबा बना हुआ है।
