चीनी का उत्पादन 28 प्रतिशत बढ़कर 78.25 लाख टन पर पहुंचा
16-Dec-2025 06:16 PM
नई दिल्ली। प्राइवेट चीनी मिलों की शीर्ष संस्था- इंडियन शुगर एन्ड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर गन्ना की उपलब्धता बढ़ने तथा मिलों की क्रशिंग क्षमता को इस्तेमाल में वृद्धि होने से चीनी का उत्पादन गत वर्ष की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है।
पिछले साल की तुलना में चालू मार्केटिंग सीजन के दौरान चीनी का घरेलू उत्पादन 15 दिसम्बर तक 61.28 लाख टन से करीब 28 प्रतिशत उछलकर 78.25 लाख टन पर पहुंच गया। क्रियाशील चीनी मिलों की संख्या भी 477 से बढ़कर 478 हो गई और गन्ना से चीनी की रिकवरी दर में सुधार आ रहा है।
इस्मा के अनुसार जामीनी स्तर पर पर किए गए आंकलन से संकेत मिलता है कि प्रमुख उत्पादक राज्यों में गन्ना की औसत उपज दर तथा गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर में अच्छी बढ़ोत्तरी हो रही है।
गत वर्ष के मुकाबले इस बार 15 दिसम्बर तक चीनी का उत्पादन उत्तर प्रदेश में 1.52 लाख टन बढ़कर 24.56 लाख टन पर पहुंचा। इसी तरह महाराष्ट्र में उत्पादन उछलकर 31.79 लाख टन पर पहुंच गया। वहां 187 मिलों में गन्ना की क्रशिंग हुई। कर्नाटक में भी चीनी के उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी देखी।
बेहतर उत्पादन, ऊंचे फ्री सेल मासिक कोटा तथा कमजोर मांग के कारण चीनी का एक्स फैक्टरी मूल्य महाराष्ट्र में घटकर 3600-3660 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया है जो इसके लागत खर्च से भी नीचे है।
इससे चीनी मिलों का घटा बढ़ने लगा है और उसे गन्ना किसानों के बकाया मूल्य का भुगतान करने में भारी कठिनाई हो सकती है। इस्मा ने सरकार से चीनी के एक्स फैक्टरी न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में तत्काल बढ़ोत्तरी करने का आग्रह किया है।
उसका कहना है कि एमएसपी में इजाफा चीनी उत्पादन के लागत खर्च के अनुरूप होना चाहिए जो 4000 रुपए प्रति क्विंटल के करीब बैठ रहा है।
दरअसल गन्ना के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में नियमित रूप से हुई वृद्धि के कारण चीनी के निर्यात का खर्च काफी ऊंचा हो गया है। एमएसपी में अपेक्षित वृद्धि होने पर ही चीनी मिलों को राहत मिल सकेगी।
