चीनी उद्योग को आगामी बजट में कुछ सार्थक नीति की घोषणा होने का भरोसा

17-Jul-2024 11:23 AM

नई दिल्ली । भारतीय चीनी उद्योग लम्बे समय से केन्द्र सरकार से एथनॉल के लिए खरीद मूल्य में इजाफा करने, गन्ना हार्वेस्टर्स के लिए वित्तीय सहायता देने तथा चीनी के आयात- निर्यात के लिए एक दीर्घकालीन नीति बनाने तथा एथनॉल उत्पादन के लिए निरन्तर नीतिगत सहयोग समर्थन जारी रखने की जोरदार मांग कर रहा है ताकि मिलों को बढ़ते लागत खर्च की समस्या से छुटकारा पाने में मदद मिल सके।

उद्योग यह भी चाहता है कि गन्ना के उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) में होने वाली बढ़ोत्तरी के अनुरूप चीनी के एक्सफैक्टरी न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में इजाफा किया जाए।

चीनी का लागत खर्च पिछले पांच साल में 3400-3500 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 4000/4100 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है जबकि इसका एमएसपी वर्ष 2019 से ही 3100 रुपए प्रति क्विंटल पर स्थिर बना हुआ है।

एक-दो बार इसे बढ़ाने का प्लान तो बनाया गया मगर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका जिससे उद्योग को घोर निराशा हुई। 

चीनी उद्योग को उम्मीद है कि केन्द्रीय वित्त मंत्री चालू माह के दौरान संसद में पेश किए जाने वाले वित्त वर्ष 2024-25 के आम बजट में कुछ सकारात्मक उपायों की घोषणा कर सकती है।

उद्योग लम्बे समय से विभिन्न झंझावातों एवं चुनौतियों से जूझ रहा है और कई कारणों से मुद्रा प्रवाह में अवरोध पैदा हो गया है।

जून 2023 से ही चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगा हुआ है जबकि उद्योग के पास इसका अधिशेष स्टॉक मौजूद है। 2023-24 के सीजन में गन्ना से एथनॉल का उत्पादन काफी घट गया क्योंकि सरकार ने एथनॉल के निर्माण में गन्ना (चीनी) के उपयोग की मात्रा को सीमित कर दिया।

इससे मिलों को होने वाली अतिरिक्त आमदनी में भारी कमी आ गई। पिछले पांच साल के अंदर विभिन्न तरह के खर्चों में काफी बढ़ोत्तरी हो गई जिससे चीनी मिलों को आय-व्यय में संतुलन बनाना मुश्किल हो रहा है।