चावल निर्यात की उदार नीति
09-Nov-2024 12:00 PM
नई दिल्ली। शानदार घरेलू उत्पादन एवं केंद्रीय पूल में मौजूद ऊंचे स्टॉक को देखते हुए सरकार ने देश से चावल के निर्यात की नीति को पुनः उदार बना दिया है। इसके तहत तमाम नियंत्रणों-प्रतिबंधों तथा शुल्क को वापस ले लिया गया है। गैर बासमती संवर्ग के सफ़ेद तथा सेला चावल का निर्यात तेजी से बढ़ने की उम्मीद है जबकि बासमती चावल के निर्यात में भी वृद्धि की निरंतरता बरकरार रहने के आसार हैं। वैसे फ़िलहाल सिर्फ साबुत श्रेणी के चावल का निर्यात खोला गया है जबकि 100 प्रतिशत टूटे चावल (ब्रोकन राइस) के शिपमेंट पर प्रतिबन्ध बरकरार है जिसे हटाने की मांग उठ रही है। निर्यातकों को उम्मीद है कि जल्दी ही सरकार इस सम्बन्ध में सकारात्मक निर्णय की घोषणा कर सकती है। इसके अलावा राइस ब्रान एक्सट्रेक्शन या डिऑइल राइस ब्रान (डीओआरबी) का निर्यात भी अभी प्रतिबंधित है जिसे हटाए जाने की आवश्यकता है क्योंकि घरेलू प्रभाग में चावल की भाँती इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी हुई है मगर कीमतों में गिरावट आने से उत्पादकों को नुकसान हो रहा है। लम्बे समय से इसके निर्यात पर रोक लगी हुई है मगर अब इसे लागू रखने की जरुरत नहीं है। दरअसल इस बार केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने रबी कालीन चावल का उत्पादन उछलकर 1199.34 लाख टन की ऊंचाई पर पहुंचने का अनुमान लगाया है जो पिछले साल के समीक्षित उत्पादन 1132.59 लाख टन से 66.75 लाख टन ज्यादा है। एक तो खरीफ सीजन में धान का क्षेत्रफल बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और दूसरे, दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन में भरपूर बारिश भी हुई। इससे फसल को काफी फायदा हुआ और पैदावार में बढ़ोत्तरी का मजबूत आधार बन गया।
भारत से चावल के निर्यात के लिए अब परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल हो गयी हैं। एक तो निर्यात उद्देश्य के लिए घरेलू प्रभाग में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में यह प्रतिस्पर्धी मूल्य पर उपलब्ध है जबकि वैश्विक बाजार में चावल की मांग भी मजबूत है। बांग्लादेश चावल की खरीद के लिए वैश्विक बाजार में आ गया है और इंडोनेशिया तथा फिलिपीन्स भी भारतीय चावल की तरफ देख रहा है। अफ्रीका तथा एशिया के अन्य परम्परागत आयातक देश भी इसकी खरीद में सक्रियता दिखा रहे हैं। यदि 2024-25 के मौजूदा वित्त वर्ष में भारत से चावल का कुल निर्यात बढ़कर पुनः 200 लाख टन से ऊपर पहुंच जाए तो कोई हैरानी की बात नहीं होगी। इसमें सफ़ेद चावल का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा।
