चावल और गेहूं के रिकॉर्ड स्टॉक से खाद्य सुरक्षा को खतरा नहीं
17-Jun-2026 05:54 PM
नई दिल्ली। केन्द्रीय पूल में चालू माह (जून) के आरंभ में चावल का स्टॉक 15 प्रतिशत बढ़कर एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जबकि गेहूं का स्टॉक भी बढ़कर पिछले पांच साल के ऊंचे स्तर पर पहुंचा। दोनों अनाज की अच्छी खरीद होने तथा पहले से बढ़ा भंडार मौजूद रहने के कारण स्टॉक में भारी वृद्धि हुई है।
भारत दुनिया में चावल का सबसे बड़ा निर्यातक देश है। विशाल स्टॉक उपलब्ध होने से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा समाप्त हो गया है। इस बार अल नीनो के प्रभाव एवं कमजोर मानसून के कारण धान-चावल के उत्पादन में कुछ कमी आने की संभावना व्यक्त की जा रही है
लेकिन घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा कीमतों में किसी भी संभावित तेजी पर अंकुश लगाने के लिए सरकार के पास चावल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसी तरह गेहूं का भारी-भरकम स्टॉक मौजूद रहने से आपूर्ति के स्टॉक सीजन में सरकार खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के माध्यम से कीमतों को नियंत्रित करने का प्रयास कर सकती है।
केन्द्रीय पूल में धान और चावल का कुल स्टॉक 1 जून 2026 को तेजी से बढ़कर 684.30 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया जो इस तिथि के लिए निर्धारित न्यूनतम बफर मात्रा 135 लाख टन से बहुत अधिक है। 1 जून 2026 को केन्द्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक भी उछलकर 534.10 लाख टन के उच्च स्तर पर पहुंच गया जो वर्ष 2021 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर तथा न्यूनतम आवश्यक बफर मात्रा 276 लाख टन से काफी अधिक है।
उद्योग-व्यापार समीक्षकों के अनुसार चावल का सरकारी स्टॉक पर्याप्त से भी ज्यादा है। इससे सरकार काफी हद तक निश्चिंत हो रही है। ऐसा लगता है कि 2026-27 सीजन के दौरान घरेलू उत्पादन में कुछ गिरावट आने के बावजूद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगने की आवश्यकता शायद नहीं पड़ेगी। आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन में भी धान-चावल की सरकारी खरीद जारी रहेगी।
सरकार अभी गेहूं के निर्यात को भी रोकने के बारे में नहीं सोच रही है। चावल का निर्यात तो पूरी तरह नियंत्रण मुक्त है जबकि गेहूं के लिए निर्यात का कोटा (50 लाख टन) नियत किया गया है इसके अलावा 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति भी दी गई है। चालू रबी मार्केटिंग सीजन में गेहूं की सरकारी खरीद 357 लाख टन के करीब पहुंच गई है।
