खरीफ कालीन दलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष से काफी पीछे
17-Jun-2026 06:49 PM
नई दिल्ली। मौसम एवं मानसून की हालत अनुकूल नहीं होने से इस वर्ष खरीफ कालीन दलहन फसलों की बिजाई की धीमी शुरुआत हुई है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात एवं मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में बिजाई की गति को बढ़ाने के लिए किसान मानसूनी वर्षा का इंतजार कर रहे हैं। इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के विभिन्न भागों में न केवल देरी से पहुंचने की संभावना है बल्कि कमजोर भी रहने का अनुमान है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान 12 जून तक दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र करीब 43 प्रतिशत पीछे चल रहा था। खरीफ सीजन में मुख्यतः अरहर (तुवर), मूंग एवं उड़द के साथ-साथ कुलथी एवं खेसारी तथा मोठ जैसे दलहन का भी उत्पादन होता है।
पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान तुवर का उत्पादन क्षेत्र 57 प्रतिशत लुढ़ककर 9 हजार हेक्टेयर, मूंग का बिजाई क्षेत्र 1.54 लाख हेक्टेयर से 55 प्रतिशत घटकर 69 हजार हेक्टेयर तथा उड़द का रकबा 35 हजार हेक्टेयर से 22 प्रतिशत गिरकर 27 हजार हेक्टेयर रह गया।
कलबुर्गी स्थित कर्नाटक प्रदेश रेड ग्राम ग्रोअर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष का कहना है कि राज्य के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में अभी तक बारिश नहीं हुई है और यह भी निश्चित नहीं है कि आगामी दिनों में समय पर वर्षा होगी या नहीं।
बरसात में देरी से किसान चिंतित है। महाराष्ट्र में भी लगभग ऐसी ही स्थिति देखी जा रही है। वहां कृषि विभाग किसानों को सुझाव दे रहा है कि जब तक मानसून की अच्छी बारिश न हो जाए तब तक फसलों की बिजाई करने में जल्दबाजी न दिखाएं। लातूर एवं सोलापुर में बिजाई अटकी हुई है। तेलंगाना में तुवर की बिजाई प्रभावित हो रही है।
राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य औसत के मुकाबले 1-15 जून के दौरान 32 प्रतिशत कम बारिश हुई। लातूर में वर्षा नहीं होने से तुवर की बिजाई आरंभ नहीं हो पाई है। कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के कुछ भागों में कुछ सप्ताह पूर्व वर्षा हुई थी और वहां मूंग की बिजाई शुरू हो गई है।
