तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए समेकित प्रयास जरूरी

17-Jun-2026 06:52 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 2025-26 सीजन के दौरान तिलहनों का कुल घरेलू उत्पादन बढ़कर 430.60 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने का अनुमान लगाया है।

तिलहन उत्पादन में मुख्य रूप से सोयाबीन सरसों एवं मूंगफली का योगदान रहता है क्योंकि इसमें से प्रत्येक का उत्पादन 100 लाख टन से ज्यादा होता है। 

तिलहन उत्पादन में इस शानदार उपलब्धि के हासिल होने के बावजूद देश में खाद्य तेलों की 60 प्रतिशत मांग एवं जरूरत को विदेशों से आयात के जरिए पूरा करना पड़ रहा है।

इससे स्पष्ट संकेत मिलता कि खाद्य तेल-तिलहन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने के लिए भारत को अभी बहुत लम्बा रास्ता तय करना पड़ेगा। जनसंख्या में वृद्धि, लोगों की आमदनी में बढ़ोत्तरी एवं बदलती खाद्य शैली के कारण देश में खाद्य तेलों की मांग एवं खपत लगातार बढ़ती जा रही है।

रसोई घरों के साथ-साथ अन्य खपतकर्ता क्षेत्रों के लिए खाद्य तेल एक महत्वपूर्ण अवयव बना हुआ है। यदि भारत वर्ष 2030 तक खाद्य तेलों का सालाना आयात घटाकर 95-100 लाख टन पर लाना चाहता है तो एक तरफ मुख्य तिलहन फसलों की औसत उपज दर को बढ़ाना और दूसरी ओर वैकल्पिक तेल धारक जिंसों का अधिक से अधिक दोहन करना आवश्यक है। इसमें राइस ब्रान एवं बिनौला भी शामिल है।