फोर्टिफाइड खाद्य उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं को जागरूक करना आवश्यक
09-Feb-2026 01:23 PM
नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर अक्सर कुपोषण के खिलाफ संघर्ष के तौर-तरीकों पर चर्चा की जाती है और इसमें पोषक तत्वों से समृद्ध खाद्य उत्पादों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बातचीत भी होती है
लेकिन जब तक आम उपभोक्तओं को इसके फायदों के बारे में पूरी जानकारी देकर जागरूक नहीं किया जाता तब तक फोर्टिफाइड खाद्य उत्पादों की मांग एवं खपत में अपेक्षित वृद्धि संभव नहीं हो पाएगी और न ही कुपोषण का संकट पूरी तरह समाप्त हो पाएगा।
वैश्विक स्तर पर 2 अरब से ज्यादा लोग फिलहाल कुपोषण की समस्या से जूझ रहे हैं जिसे अक्सर छिपी हुई भुखमरी कहा जाता है।
हालांकि लोगों के शरीर में आयरन, जिंक, विटामिन एवं फोलिक एसिड आदि का अभाव अक्सर सामान्य रूप से दिखाई नहीं पड़ता है लेकिन अंदर ही अंदर वह शरीर को कमजोर कर देता है और उसकी प्रजनन क्षमता को भी बुरी तरह प्रभावित कर देता है।
भारत सरकार ने कुपोषण की समस्या को दूर करने का प्रयास आरंभ किया है जिसका सकारात्मक परिणाम आगामी समय में सामने आ सकता है। भारत में खाद्यान्न का पर्याप्त उत्पादन होता है जिससे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में कोई कठिनाई नहीं होती है मगर असली समस्या मात्रा की नहीं बल्कि क्वालिटी की है।
भारतीय उपभोक्ताओं को अनाज तो मिल जाता है मगर पौष्टिक आहार नहीं मिलता है इसलिए शरीर अक्सर खाना खाने के बाद भी वास्तविक अर्थ में भूखा ही रह जाता है।
यह चुनौती बहुत बड़ी है और इससे निपटने के लिए व्यापक स्तर पर जन जागरण अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है।
सरकार द्वारा जन वितरण प्रणाली के अंतर्गत-फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति की जा रही है मगर उपभोक्ता उसका उठाव करने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
