गेहूं के सरकारी खरीद मूल्य में विसंगति को दूर करने की आवश्यकता

25-Dec-2024 04:03 PM

नई दिल्ली । केन्द्रीय पूल में गेहूं का योगदान देने वाले दो महत्वपूर्ण प्रांतों- मध्य प्रदेश तथा राजस्थान में एक बार फिर 2025 के रबी मार्केटिंग सीजन के दौरान इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न पर किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से ऊपर 125 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिए जाने की संभावना है

जबकि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, गुजरात तथा बिहार जैसे अन्य प्रमुख उत्पादक राज्यों के किसानों को यह बोनस नहीं मिलेगा।

केन्द्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2275 रुपए प्रति क्विंटल से 150 रुपए बढ़ाकर 2425 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है जबकि मध्य प्रदेश एवं राजस्थान के किसानों को इससे 125 रुपए ज्यादा यानी 2550 रुपए प्रति क्विंटल का मूल्य प्राप्त होगा।

जाहिर है कि इन दोनों राज्यों में मिलर्स एवं व्यापारियों को इससे भी ऊंचे दाम पर गेहूं खरीदने के लिए विवश होना पड़ेगा जबकि अन्य प्रांतों में उससे नीचे दाम पर गेहूं खरीदा जा सकता है। इससे बाजार में गेहूं की कीमतों में विसंगति पैदा होगी जिसे दूर करना आवश्यक है। 

राजस्थान में एमएसपी पर गेहूं बेचने के इच्छुक किसानों का रजिस्ट्रेशन ऑन लाइन पोर्टल पर 1 जनवरी से 25 जून 2025 के बीच होगा जबकि 10 मार्च से वहां गेहूं की खरीद आरंभ हो जाएगी जो अब जून तक जारी रहेगी। 

ध्यान देने की बात है कि एक तरफ गेहूं पर अतिरिक्त बोनस दिया जा रहा है तो दूसरी ओर इसके बाजार भाव को नियंत्रित करने के लिए उद्योग व्यापार क्षेत्र पर तरह-तरह की पाबंदियां लगाई जा रही हैं।

जब मिलर्स- प्रोसेसर्स एवं व्यापारियों- स्टॉकिस्टों को ऊंचे दाम पर गेहूं की खरीद के लिए विवश होना पड़ेगा तो उनसे सस्ते दाम पर खुले बाजार में इसकी बिक्री करने की उम्मीद करना बेमानी है।

गत वर्ष भी ऐसा ही हुआ था जिसके परिणामस्वरूप गेहूं का भाव पूरे साल भर तक ऊंचे स्तर पर बरकरार रहा। सरकार इसे नियंत्रित करने के लिए विभिन्न उपायों एवं कदमों के जरिए व्यापारियों पर दबाव बनाती रही।

अतिरिक्त बोनस के लाभ से उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार एवं गुजरात जैसे राज्यों के गेहूं उत्पादकों को उचित रखा जा रहा है जिसका कोई औचित्य नहीं है। सभी किसानों को समान मूल्य मिलना चाहिए।