गेहूं पर भंडारण सीमा का आदेश आगामी महीनों के लिए बाजार को सख्त संदेश
29-May-2025 05:35 PM
नई दिल्ली। हालांकि कथित रूप से सरकार ने घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से गेहूं पर भंडारण सीमा (स्टॉक लिमिट) का आदेश लागू किया है और इसकी उच्चतम मात्रा थोक विक्रेताओं (होल सेलर्स) के लिए केवल 3000 टन तथा खुदरा व्यापारियों के लिए 10 टन नियत की गई है लेकिन फ्लोर मिलर्स का कहना है कि यह आदेश आगामी महीनों के लिए बाजार को दिया गया एक सख्त संदेश और संकेत है।
सरकार केवल तात्कालिक तौर पर गेहूं की कीमतों में तेजी पर अंकुश लगाने का प्रयास नहीं कर रही है बल्कि आगामी महीनों में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति को सुगम बनाए रखने का आधार भी तैयारी कर रही है। सरकार चाहती है कि मार्केट में गेहूं का निर्बाध कारोबार जारी रहे और इसका स्टॉक अनावश्यक रूप से रोकने का प्रयास न किया जाए।
फ्लोर मिलर्स के मुताबिक वर्तमान भंडारण सीमा आदेश से बाजार पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है। प्राइवेट क्षेत्र के पास अच्छा स्टॉक है और खरीद-बिक्री की कोई घबराहटपूर्ण स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है।
छोटे एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों के लिए भंडारण की सीमा सामान्य है लेकिन बड़े-बड़े स्टॉकिस्टों को इससे कठिनाई हो सकती है। छोटे व्यापारियों के पास 3000 टन से अधिक गेहूं के स्टॉक को अपने पास रोकने की क्षमता नहीं होती है।
दिलचस्प तथ्य यह है कि सरकार ने प्रोसेसर्स को उसकी कुल प्रोसेसिंग क्षमता के 70 प्रतिशत तक गेहूं का स्टॉक रखने की अनुमति ही है जो बहुत बड़ी मात्रा है। आमतौर पर मिलर्स 50-60 प्रतिशत के स्टॉक के साथ काम करते हैं।
मिलर्स के अनुसार गेहूं पर स्टॉक सीमा लगने का अनुमान पहले से ही लगाया जा रहा था इसलिए इसके लागू होने के बावजूद कीमतों में ज्यादा गिरावट आना मुश्किल लगता है।
नवीनतम आदेश के अंतर्गत व्यापारियों एवं रिटेलर्स को नियत सीमा से अधिक मात्रा के गेहूं का स्टॉक महज 15 दिनों में बाजार में उतारना आवश्यक होगा और खाद्य तथा सार्वजनिक वितरण विभाग के पोर्टल पर इसकी जानकारी उपलब्ध करवानी पड़ेगी।
पिछले साल अतिरिक्त स्टॉक को बाजार में उतारने के लिए 30 दिन का समय दिया गया था। इससे साफ संकेत दिया गया है कि सरकार गेहूं की कीमतों के प्रति काफी संवेदनशील है और वह इसमें तेजी को नियंत्रित करना चाहती है।
