गेहूं उत्पादों के निर्यात से उद्योग को मिलेगी राहत
19-Jan-2026 09:02 PM
नई दिल्ली। देर से ही सही लेकिन भारत सरकार ने अब मिलर्स-प्रोसेसर्स को 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति प्रदान कर दी है जिसमें आटा, मैदा सूजी सहित अन्य उत्पाद भी शामिल है। भारत दुनिया में गेहूं का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
मूल्य संवर्धित उत्पादों का निर्यात आरंभ होने पर थोक मंडियों में गेहूं का भाव सुधरने तथा खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत सरकारी गेहूं की बिक्री बढ़ने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि घरेलू उत्पादन में गिरावट आने तथा बाजार भाव तेज होने के कारण सरकार ने मई 2022 में गेहूं के व्यापारिक निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था और फिर इसके मूल्य संवर्धित उत्पादों के शिपमेंट को भी रोक दिया था।
उससे पूर्व भारत से गेहूं एवं इसके उत्पादों का निर्यात तेजी से बढ़कर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था इसलिए जब उत्पादन में जोरदार गिरावट आ गई तब इसकी कीमतों में तेजी का नया दूर शुरू हो गया और आम लोगों की कठिनाई बढ़ गई।
ऊंचे बाजार भाव के कारण केन्द्रीय पूल के लिए गेहूं की सरकारी खरीद में कमी आ गई और लम्बे समय के बाद इसकी मात्रा घटकर 200 लाख टन से भी नीचे रह गई।
सरकारी स्टॉक कम होने से करीब 10 राज्यों में सर्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के अंतर्गत गेहूं के कोट में कटौती कर दी गई। बाद में गेहूं की सरकारी खरीद का स्तर कुछ सुधरकर क्रमश: 262 लाख टन, 266 लाख टन तथा 302 लाख टन पर पहुंचा और घरेलू उत्पादन में भी नियमित रूप से इजाफा होता रहा।
इसे देखते हुए स्वदेशी उद्योग में सरकार से 10 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की स्वीकृति देने का आग्रह किया और और सम्पूर्ण स्थिति का गहराई से अध्ययन- विश्लेषण करने के बाद सरकार ने अंततः 5 लाख टन गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति देने का निर्णय लिया। पड़ोसी देशों के साथ-साथ मध्य पूर्व एवं पश्चिम एशिया के बाजारों में भारतीय गेहूं उत्पादों का निर्यात हो सकता है।
