गुजरात में भारी बेमौसमी वर्षा से मूंगफली की फसल क्षतिग्रस्त

03-Nov-2025 11:06 AM

राजकोट। देश में मूंगफली के सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य-गुजरात में दीपावली पर्व के बाद दूर-दूर तक हुई जोरदार बेमौसमी वर्षा से इस महत्वपूर्ण तिलहन फसल को भारी नुकसान होने की सूचना मिल रही है। इससे शानदार उत्पादन के उम्मीद पर पानी पड़ गया है। राज्य के ऐसे इलाकों में अत्यंत मूसलाधार बारिश हुई जहां मूंगफली की नई फसल की कटाई-तैयारी शुरू हो चुकी थी या फसल पककर कटने के लिए तैयार हो गयी थी। फसल को हुई भारी क्षति से मूंगफली का उत्पादन घटने तथा भाव तेज होने की सम्भावना है जिससे मूंगफली तेल की कीमत भी बढ़ सकती है।
आमतौर पर गुजरात में मध्य अक्टूबर के बाद मूंगफली फसल की कटाई शुरू हो जाती है जो नवम्बर के प्रथम सप्ताह से कटाई की रफ़्तार बढ़ने लगती है। लेकिन इस बार असामयिक वर्षा होने से मूंगफली की फसल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गयी है और इसकी क्वालिटी भी प्रभावित हो रही है। खासकर सौराष्ट्र संभाग में तेज हवा के साथ मूसलाधार वर्षा होने से मूंगफली की फसल जमीन पर बिछ गयी और पानी या कीचड़ में धंस गयी। फसल को हुए नुकसान का आंकलन किया जा रहा है।
गुजरात में इस बेमौसमी वर्षा से पूर्व मूंगफली की फसल काफी अच्छी हालत में थी और वहां इसका शानदार उत्पादन होने की उम्मीद की जा रही थी। राज्य में इस तिलहन के बिजाई क्षेत्र में भारी बढ़ोत्तरी हुई थी। गुजरात सरकार इस बार 60 लाख टन से ज्यादा मूंगफली के उत्पादन का अनुमान लगा रही थी जबकि उद्योग-व्यापार क्षेत्र का अनुमान 45-46 लाख टन का था। गुजरात के राजकोट में मूंगफली तेल का भाव फ़िलहाल 2380-2430 रुपए प्रति टीन (15 किलो) के बीच चल रहा है जो दीपावली के समय बढ़कर 2475 रुपए प्रति 15 किलो तक पहुंच गया था। मूंगफली के नए माल की आवक शुरू होने पर यह घटकर 2350 रुपए प्रति टीन पर आ गया था।
असामयिक वर्षा से मूंगफली फसल की कटाई-तैयारी में देर हो जाएगी और अब 15 नवम्बर के बाद ही इसकी आवक की गति तेज होने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। समीक्षकों का कहना है कि अगर वर्षा का दौर जारी रहा तो मूंगफली और इसके तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी का माहौल बरक़रार रह सकता है। गुजरात के कम से कम एक दर्जन जिलों में मूंगफली का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है जिसमें अधिकांश जिले सौराष्ट्र संभाग में स्थित हैं। राजकोट में इसका बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 2.68 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस बार 3.29 लाख हेक्टेयर हो गया। मूंगफली की सरकारी खरीद में देरी होने तथा नैफेड द्वारा अपना स्टॉक मंडियों में उतारने से भी किसानों की कठिनाई बढ़ गयी।