गन्ना के सैप में हुई वृद्धि से चीनी मिलों का संकट बढ़ा
20-Jan-2026 03:50 PM
नई दिल्ली। शीर्ष उद्योग संस्था- इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, पंजाब तथा हरियाणा में गन्ना के लिए राज्य समर्थित मूल्य (सैप) पहले से ही प्रभावी है
जबकि अब बिहार में भी इसे 15 रुपए बढ़ाकर अगैती किस्मों के लिए 380 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित करने का निश्चय किया गया है।
इस्मा के अनुसार सैप में हुई बढ़ोत्तरी से गन्ना उत्पादकों को तो राहत मिलेगी लेकिन साथ ही साथ चीनी के उत्पादन खर्च में भी बढ़ोत्तरी हो जाएगी। दोनों के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है।
दूसरी ओर चीनी का एक्स फैक्टरी बिक्री मूल्य घटकर महाराष्ट्र एवं कर्नाटक जैसे राज्यों में फिलहाल 3550 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास रह गया है जो इसके औसत लागत खर्च से काफी नीचे है।
इससे चीनी मिलों के लिए वित्तीय संकट गहराता जा रहा है और गन्ना किसानों के बकाया मूल्य का भुगतान करने में भारी कठिनाई हो सकती है।
जैसे-जैसे सीजन आगे बढ़ेगा वैसे-वैसे मिलों के पास चीनी का स्टॉक भी बढ़ता जाएगा। चीनी मिलों पर गन्ना उत्पादकों का बकाया बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं जो आगे और भी तेजी से बढ़ने की संभावना है।
घरेलू चीनी बाजार की मौजूदा हालत उद्योग के लिए अनुकूल नहीं है। चीनी का विशाल स्टॉक जमा होने पर मिलों की क्रियाशील पूंजी फंस जाएगी और गन्ना किसानों को बकाए का भुगतान करने के लिए उसके पास नकदी नहीं बचेगी।
इसे देखते हुए सरकार को यथाशीघ्र चीनी के एक्स फैक्टरी न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) की समीक्षा करते हुए इसके चीनी के उत्पादन खर्च के अनुरूप इजाफा करना चाहिए ताकि मिलों को कुछ राहत मिल सके।
