ग्रीष्मकालीन फसलों का क्षेत्रफल 7 प्रतिशत बढ़कर 79 लाख हेक्टेयर के करीब पहुंचा

15-May-2025 12:22 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वर्ष के दौरान ग्रीष्मकालीन या जायद फसलों का उत्पादन क्षेत्र 9 मई तक बढ़कर 78.82 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 71.94 लाख हेक्टेयर से करीब 7 लाख हेक्टेयर या 7 प्रतिशत ज्यादा है।

मौसम की हालत अनुकूल रहने से किसानों ने बिजाई में अच्छी दिलचस्पी दिखाई जिससे लगभग सभी फसलों का रकबा बढ़ गया। गुजरात, महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण उत्पादक राज्यों में फसलों की सिंचाई के लिए पानी की अच्छी उपलब्धता रही और किसानों को खेती करने में कोई खास कठिनाई नहीं हुई।

जायद सीजन में रकबा बढ़ने से 2024 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन में खासकर चावल और मक्का का उत्पादन उछलकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाने की उम्मीद है। अधिकांश फसलों का उत्पादन क्षेत्र न केवल पिछले साल के रकबे से बल्कि सामान्य औसत क्षेत्रफल से भी ऊंचा रहा। 

उदाहरणस्वरूप, धान का उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 32.02 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो गत वर्ष के रकबा 28.57 लाख हेक्टेयर तथा सामान्य औसत क्षेत्रफल 30.80 लाख हेक्टेयर से अधिक है।

इसी तरह दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष की तुलना में 1.50 प्रतिशत बढ़कर 22.70 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो सामान्य औसत क्षेत्रफल 21.65 लाख हेक्टेयर से 1.05 लाख हेक्टेयर ज्यादा है।

दलहनों के संवर्ग में मूंग का बिजाई क्षेत्र 18.44 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 19.45 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा। उड़द के क्षेत्रफल में 0.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि अन्य दलहनों का रकबा 18 हजार हेक्टेयर पर स्थिर रहा। 

मक्का सहित मोटे अनाजों (श्री अन्न) का उत्पादन क्षेत्र भी गत वर्ष 12.95 लाख हेक्टेयर से 1.6 प्रतिशत बढ़कर 14.59 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।

इसके तहत मक्का का रकबा 7.37 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 8.89 लाख हेक्टेयर तथा बाजरा का बिजाई क्षेत्र 4.96 लाख हेक्टेयर से 1 प्रतिशत सुधरकर 5.05 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।

तिलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र भी 9.23 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 9.51 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा इसके तहत मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 4.11 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 4.31 लाख हेक्टेयर,

तिल का क्षेत्रफल 4.73 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 4.77 लाख हेक्टेयर तथा सूरजमुखी का रकबा 31 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 36 हजार हेक्टेयर हो गया।