घरेलू उत्पादन में वृद्धि से मक्का निर्यात के आसार बढ़े

04-Nov-2025 08:03 PM

मुम्बई। उद्योग-व्यापार क्षेत्र के विश्लेषकों का कहना है कि लगातार दूसरे साल खरीफ सीजन में मक्का का रिकॉर्ड उत्पादन होने की उम्मीद है और इसका घरेलू बाजार भाव भी घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास या इससे नीचे आ गया है

लेकिन इसके बावजूद मौजूदा रबी सीजन या अगले खरीफ सीजन के दौरान इसके बिजाई क्षेत्र में ज्यादा कमी आने की संभावना नहीं है क्योंकि किसानों को अन्य फसलों की तुलना में मक्का की खेती से बेहतर वापसी (आमदनी) प्राप्त होती रहेगी। मक्का की खेती पर लागत खर्च कम बैठता है। 

किसानों के आसपास ऐसे आकर्षक विकल्पों का अभाव है जो एक तरफ ऊंची आमदनी सुनिश्चित करे और दूसरी ओर नुकसान का जोखिम भी कम रखे।

मक्का की फसल  मानदंडों पर खरा उतरती है इसलिए इसकी खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण आगे भी बरकरार रहने की उम्मीद है। मक्का का घरेलू बाजार भाव नरम पड़ने से भारत को इसके वैश्विक निर्यात बाजार में सक्रिय होने का अच्छा अवसर मिल सकता है। 

एक अग्रणी विश्लेषक के अनुसार शानदार उत्पादन एवं कमजोर मांग के कारण 2025-26 सीजन के दौरान मक्का का घरेलू बाजार भाव कुछ नरम रहने की संभावना है। एथनॉल उद्योग में इसकी मांग कुछ धीमी पड़ गई है।

मंडियों में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की हालत सुगम बनी हुई है। खरीफ के बाद रबी सीजन की फसल भी आएगी। इसके फलस्वरूप अगले साल जून-जुलाई तक इस महत्वपूर्ण मोटे अनाज की कीमतों में जोरदार उछाल आने की संभावना नहीं है। रबी कालीन मक्के की बिजाई पहले ही आरंभ हो चुकी है। 

वर्तमान समय में मक्का का दाम घटकर 1600 से 1900 रुपए प्रति क्विंटल के बीच आ गया है जो सरकारी समर्थन मूल्य से काफी नीचे है। सरकार ने मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2024-25 सीजन के 2225 रुपए प्रति क्विंटल से 175 रुपए बढ़ाकर 2025-26 सीजन के लिए 2400 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।

फिलहाल मंडियों में आने वाले मक्का में नमी का अंश मान्यता स्वीकृत सीमा से ऊंचा है इसलिए व्यापारी कम दाम पर इसकी खरीद का प्रयास कर रहे हैं। आगे सूखा माल आने पर भाव कुछ सुधरने के आसार हैं।