इस्मा द्वारा सरकार से 20 लाख टन चीनी के निर्यात की स्वीकृति देने का आग्रह

05-Nov-2025 02:47 PM

नई दिल्ली। स्वदेशी चीनी उद्योग के शीर्ष संगठन- इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) ने 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन में शानदार घरेलू उत्पादन का अनुमान लगाते हुए सरकार से 20 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति देने का आग्रह किया है ताकि उद्योग पर बकाया स्टॉक के भार में कमी आ सके, उसके मुद्रा प्रवाह की गति तेज रह सके और गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान करने में कठिनाई न हो। 

इस्मा के अनुसार 2024-25 के मुकाबले 2025-26 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान चीनी के घरेलू उत्पादन में 16 प्रतिशत का भारी इजाफा होने की उम्मीद है और खासकर महाराष्ट्र तथा कर्नाटक में उत्पादन तेजी से बढ़ सकता है। उत्तर प्रदेश में भी उत्पादन सुधरने के आसार हैं।

चीनी का उत्पादन घरेलू मांग एवं जरूरत से काफी ज्यादा होने वाला है। यदि निर्यात की स्वीकृति नहीं दी गई तो उद्योग के पास चीनी का स्टॉक काफी बढ़ जाएगा और मुद्रा प्रवाह अवरुद्ध हो सकता है। क्रियाशील पूंजी के अभाव में सही समय पर गन्ना उत्पादकों के बकाए का भुगतान करने में भारी कठिनाई हो सकती है। 

इस्मा की एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि चीनी की सुविधाजनक बैलेंसशीट को देखते हुए भारत इस बार 20 लाख टन तक निर्यात करने की स्थिति में हैं और इसलिए सरकार से चीनी की निर्यात नीति की घोषणा जल्दी से जल्दी करने का जोरदार आग्रह किया गया है ताकि मिलर्स को अग्रिम तौर पर कच्ची चीनी एवं सफेद चीनी के उत्पादन की अपनी रणनीति बनाने का पर्याप्त अवसर मिल सके।

ज्ञात हो कि पिछले मार्केटिंग सीजन में सरकार ने 10 लाख टन चीनी के निर्यात की मंजूरी दी थी मगर इसकी घोषणा काफी देर से यानी जनवरी 2025 के तीसरे सप्ताह में की गई थी। इससे चीनी का निर्यात 7.75 लाख टन के करीब ही पहुंच सका।

इस्मा का कहना है कि सरकार ने गन्ना आधारित डिस्टीलरीज के लिए एथनॉल की आपूर्ति का जो कोटा निर्धारित किया है उसके उत्पादन के लिए महज 34 लाख टन चीनी की जरूरत पड़ेगी जबकि चीनी का सकल उत्पादन 343.50 लाख टन होने का अनुमान है।

इस तरह खाद्य उद्देश्य के लिए 309.50 लाख टन चीनी का स्टॉक बचेगा जो 285 लाख टन की संभावित घरेलू खपत से 24.50 लाख टन अधिक होगा।

उद्योग के पास पहले से ही 50 लाख टन चीनी का पिछला बकाया स्टॉक मौजूद है इसलिए 20 लाख टन के निर्यात की अनुमति से घरेलू बाजार पर कोई असर नहीं पड़ेगा।