इस्मा द्वारा सरकार से एथनॉल के आयात पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह

16-Jul-2025 08:10 PM

नई दिल्ली। प्राइवेट चीनी मिलों की शीर्ष संस्था-  इंडियन शुगर एन्ड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (इस्मा) ने ईंधन उपयोग के लिए एथनॉल के आयात पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया है।

उसने आगाह किया है कि यदि विदेशों से एथनॉल का आयात हुआ तो घरेलू निर्माताओं को भारी नुकसान होगा इस क्षेत्र में नए निवेश बंद हो जाएगा और गन्ना उत्पादकों को सही समय पर बकाया मूल्य का भुगतान करने में कठिनाई उत्पन्न हो जाएगी। 

दरअसल भारत और अमरीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता के लिए होने वाली बातचीत में एथनॉल के आयात पर भी वर्चा होने की खबर आ रही है जिसे देखते हुए इस्मा ने सरकार को आगाह किया है।

जानकर सूत्रों के मुताबिक अमरीका भारतीय बाजारों में ईंधन के रूप में उपयोग के लिए अपने एथनॉल की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भारत पर दबाव डाल रहा है। अमरीका में मुख्यतः अनाजों से एथनॉल का निर्यात किया जाता है।

केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री को भेजे एक पत्र में इस्मा ने कहा है कि अमरीका से एथनॉल के आयात की अनुमति भारतीय उद्योग पर गहरा प्रतिकूल असर पड़ेगा। भारत ने एथनॉल के उत्पादन में अब तक जो प्रगति की है वह बेकार हो जाएगी।

हाल के वर्षों में देश के अंदर एथनॉल के निर्माण की क्षमता में भारी इजाफा हुआ है। वर्ष 2018 से अब तक इस क्षेत्र में करीब 40,000 करोड़ रुपए का विशाल निवेश हो चुका है और इस अवधि के दौरान एथनॉल उत्पादन की क्षमता में भी 140 प्रतिशत से अधिक की जोरदार वृद्धि हो चुकी है।  

पत्र में कहा गया है कि यदि ईंधन (पेट्रोल में मिलाने) उपयोग के लिए एथनॉल के आयात की अनुमति दी गई तो स्वदेशी उद्योग में गतिहीनता आ जाएगी और इसकी क्षमता में हुई वृद्धि का उपयोग करना संभव नहीं हो पाएगा।

निवेश की प्रक्रिया थम जाएगी और रोजगार सृजन का अवसर भी समाप्त हो जाएगा। भारत में पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण का स्तर पहले ही 19 प्रतिशत पर पहुंच चुका है और 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन के लिए निर्धारित लक्ष्य 20 प्रतिशत को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

नवम्बर 2024 से चल रहा वर्तमान मार्केटिंग सीजन अक्टूबर 2025 तक जारी रहेगा। यह नियत लक्ष्य अपने निर्धारित समय से एक वर्ष पूर्व ही हासिल हो जाएगा। सरकार को एथनॉल आयात की अनुमति नहीं देनी चाहिए।