जम्मू कश्मीर में केसर की उपज दर में भारी गिरावट आने की आशंका
30-Oct-2025 01:53 PM
श्रीनगर। हालांकि जम्मू कश्मीर में केसर के खेतों में फूल खिले हुए हैं लेकिन जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से उपज दर में भारी गिरावट आने की आशंका है। इससे कुल उत्पादन घट सकता है। कुछ क्षेत्रों में उपज दर 75 प्रतिशत तक घटने का अनुमान लगाया जा रहा है।
वहां केसर के बिजाई क्षेत्र में भी काफी गिरावट आ गई। नब्बे के दशक के अंत में जम्मू कश्मीर में केसर का बिजाई क्षेत्र करीब 5700 हेक्टेयर था जो 2025 में घटकर 3665 हेक्टेयर रह गया। कश्मीर का पाम्पोर संभाग केसर उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।
केसर की नई फसल की तुड़ाई-तैयारी चल रही है मगर इसकी उपज दर से उत्पादक खुश नहीं है। पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष फसल की हालत कमजोर बताई जा रही है।
कुछ क्षेत्रों में गत वर्ष के मुकाबले इस बार किसानों को केवल 25-30 प्रतिशत उत्पादन ही प्राप्त हो रहा है। पहले प्रत्यके किसान को एक पंक्ति में केसर के फूलों की तुड़ाई से पूरी टोकरी भर जाती थी मगर इस बार आधी टोकरी भी नहीं भर रही है। ध्यान देने की बात है कि पिछले साल भी फसल की हालत बहुत अच्छी नहीं रही थी लेकिन फिर भी चालू वर्ष की तुलना में बेहतर थी।
पाम्पोर संभाग में अधिकांश किसानों ने नई फसल की तुड़ाई-तैयारी आरंभ कर दी है। उत्पादकों का कहना है कि अक्टूबर का महीना सूखा रहने से केसर की फसल काफी हद तक प्रभावित हुई है और इसके कोर्म का ठीक से विकास नहीं हो पाया।
कोर्म इस बार पतला देखा जा रहा है और इसकी उपज दर कमजोर देखी जा रही है। कश्मीर में 20 हजार से अधिक परिवार अपनी आजीविका के लिए केसर की खेती पर ही आश्रित है।
पाम्पोर संभाग में लगभग 3200 हेक्टेयर भूमि में केसर की खेती नियमित रूप से की जाती है। लेकिन वहां वर्षों से इसके उत्पादन में कमी आ रही है। पिछले दो साल से वहां जमकर हिमपात नहीं हुआ है और गर्मी के दिनों में तापमान काफी ऊंचा रहता है।
हालांकि सरकार ने वर्ष 2007 में एक कानून बनाकर केसर के परम्परागत खेतों का उपयोग किसी अन्य उद्देश्य में करने पर रोक लगा दी थी और वर्ष 2010 में राष्ट्रीय केसर मिशन की लांचिंग भी की गई जिसके लिए 412 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया लेकिन फिर भी मौसम के प्रतिकूल प्रभाव से फसल को बचाने में पूरी सफलता नहीं मिल रही है।
